22 सितंबर 2026: दिल्ली हाईकोर्ट को सात नए न्यायाधीश मिले हैं। सोमवार, 21 सितंबर 2026 को सात न्यायिक अधिकारियों ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सभी नए न्यायाधीशों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 50 हो गई है, जबकि अदालत की स्वीकृत क्षमता 60 न्यायाधीशों की है।
सात नए जजों ने ली शपथ
दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वालों में निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना, संजय शर्मा, भारत पराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज शामिल हैं।
सभी सात न्यायिक अधिकारी इससे पहले दिल्ली की जिला न्यायपालिका में अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। सोमवार को हाईकोर्ट परिसर में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने नए न्यायाधीशों का स्वागत किया।
दो स्थायी, पांच अतिरिक्त जज नियुक्त
इन सात नियुक्तियों में निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय सक्सेना को दिल्ली हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
वहीं संजय शर्मा, भारत पराशर, डॉ. अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज को अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया है। नए न्यायाधीशों ने अपने पद की शपथ क्रमशः हिंदी और अंग्रेजी में ली।
जिला अदालतों में रहा लंबा अनुभव
सातों नए न्यायाधीशों के पास दिल्ली की जिला अदालतों में काम करने का लंबा अनुभव है। उन्होंने आपराधिक मामलों, सिविल विवादों, प्रशासनिक मामलों और अन्य न्यायिक कार्यों की सुनवाई से जुड़े विभिन्न पदों पर काम किया है।
अरुण भारद्वाज हाईकोर्ट में न्यायाधीश बनने से पहले रजिस्ट्रार जनरल के पद पर कार्यरत थे। वहीं भारत पराशर सुप्रीम कोर्ट में सेक्रेटरी जनरल के पद पर रह चुके हैं। अन्य अधिकारियों ने भी दिल्ली जिला न्यायपालिका में वरिष्ठ न्यायिक जिम्मेदारियां संभाली हैं।
60 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले अब 50 जज
दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 60 है। सात नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 50 हो गई है। इसका मतलब है कि अभी भी 10 पद खाली हैं।
नई नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। अदालत में आपराधिक अपील, वाणिज्यिक विवाद, पारिवारिक मामले, संवैधानिक मुद्दे और सरकार से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई होती है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भेजे थे 8 नाम
इन नियुक्तियों की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद आगे बढ़ी। कॉलेजियम ने 10 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट के लिए आठ न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी।
इसके बाद केंद्र सरकार ने 19 सितंबर को सात नियुक्तियों को अधिसूचित किया। आठवें नाम के रूप में अनुशंसित न्यायिक अधिकारी गुरविंदर पाल सिंह की नियुक्ति इस अधिसूचना में शामिल नहीं थी।
हाईकोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद की उम्मीद
सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से दिल्ली हाईकोर्ट में उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ी है। इससे अलग-अलग मामलों की सुनवाई के लिए अधिक पीठों के गठन में मदद मिल सकती है।
हालांकि, केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती। मामलों की संख्या, सुनवाई की गति और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे कई अन्य कारक भी न्यायिक कामकाज को प्रभावित करते हैं।
दिल्ली की न्याय व्यवस्था के लिए अहम नियुक्तियां
दिल्ली हाईकोर्ट देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक अदालतों में से एक है और यहां बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की सुनवाई होती है। जिला न्यायपालिका से सात अनुभवी अधिकारियों का हाईकोर्ट में आना न्यायिक अनुभव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नए न्यायाधीश अब हाईकोर्ट की विभिन्न पीठों में मामलों की सुनवाई करेंगे। आने वाले समय में उनकी जिम्मेदारी संवैधानिक, आपराधिक, सिविल, वाणिज्यिक और प्रशासनिक मामलों से जुड़े विवादों पर निर्णय देने की होगी।
