2 सितंबर 2026 दिल्ली सरकार ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) से संबद्ध कॉलेजों में दाखिले को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने खाली रह जाने वाली सीटों को भरने के लिए मौजूदा रैंक-कैपिंग सिस्टम को खत्म कर दिया है। अब नियमित काउंसलिंग राउंड के बाद खाली बची सीटों के लिए अधिक संख्या में उम्मीदवार दाखिले के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। यह बदलाव 2026-27 के दाखिला सत्र से लागू किया गया है।
तीन साल में 29,153 सीटें खाली
दिल्ली सरकार का यह फैसला पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने के बाद आया है। यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में कुल 39,398 सीटों में से 11,916 सीटें खाली रह गई थीं।
इसके बाद 2024-25 में कुल 40,604 सीटों में से 8,512 सीटें नहीं भर सकीं। वहीं 2025-26 में कुल 42,749 सीटों में से 8,725 सीटें खाली रहीं। इस तरह तीन वर्षों में कुल 29,153 सीटें खाली रह गईं।
रैंक कैपिंग खत्म करने का मकसद
पहले नियमित ऑनलाइन काउंसलिंग के बाद खाली बची सीटों को भरने के लिए एक अधिकतम रैंक सीमा लागू थी। इसके कारण निर्धारित क्लोजिंग रैंक से नीचे आने वाले उम्मीदवार कई खाली सीटों के लिए भी पात्र नहीं हो पाते थे।
अब इस व्यवस्था को हटाने का उद्देश्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ाना और उन सीटों को भरना है, जो नियमित काउंसलिंग के बाद खाली रह जाती हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे कॉलेजों की उपलब्ध सीटों और बुनियादी सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
NCR के कॉलेजों में सबसे ज्यादा समस्या
यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के अनुसार, खाली सीटों का बड़ा हिस्सा दिल्ली के बाहर लेकिन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में स्थित संबद्ध कॉलेजों में रहा है। इनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद के कॉलेज शामिल हैं।
इन संस्थानों में 85 प्रतिशत सीटें दिल्ली कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली के कई छात्र और उनके माता-पिता राजधानी से दूर स्थित कॉलेजों में दाखिला लेने को प्राथमिकता नहीं देते। इसका सीधा असर इन कॉलेजों में सीटों के भरने पर पड़ा है।
सब-कमेटी की रिपोर्ट के बाद फैसला
रैंक-कैपिंग खत्म करने का फैसला सरकार की ओर से गठित एक सब-कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट के बाद लिया गया। इस समिति को नारायणस्वामी समिति की सिफारिशों, मौजूदा दाखिला नियमों और GGSIPU से संबद्ध सेल्फ-फाइनेंसिंग कॉलेजों से जुड़े नियामक ढांचे की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
समिति ने GGSIPU के प्रतिनिधियों और सेल्फ-फाइनेंसिंग संस्थानों के संगठनों के साथ भी विचार-विमर्श किया। समीक्षा के दौरान समिति ने पाया कि हर साल बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने के कारण यूनिवर्सिटी और संबद्ध कॉलेजों के संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इसके बाद मौजूदा रैंक-कैपिंग नीति को खत्म करने की सिफारिश की गई।
फिजिकल स्पॉट काउंसलिंग की नई व्यवस्था
रैंक कैप खत्म करने के साथ ही दिल्ली सरकार ने फिजिकल स्पॉट काउंसलिंग की नई व्यवस्था को भी मंजूरी दी है। यह प्रक्रिया DTU, NSUT और IGDTUW जैसे संस्थानों में अपनाए जा रहे मॉडल की तर्ज पर होगी।
नई व्यवस्था के तहत जिस दिन स्पॉट काउंसलिंग होगी, उस दिन शारीरिक रूप से उपस्थित उम्मीदवारों को ही उस दिन की मेरिट लिस्ट में शामिल किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध खाली सीटों का आवंटन उम्मीदवारों की मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
2026-27 से लागू हुआ बदलाव
दिल्ली के उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में फैसला अधिसूचित कर दिया है। यह व्यवस्था 2026-27 के दाखिला सत्र से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। हालांकि, यह व्यवस्था सब-कमेटी की अंतिम सिफारिश आने तक या सरकार की ओर से किसी नए आदेश तक लागू रहेगी।
इससे उन उम्मीदवारों को फायदा मिलने की संभावना है, जिनकी रैंक पहले निर्धारित सीमा के कारण खाली सीटों के लिए स्वीकार नहीं की जाती थी।
निजी संस्थानों के लिए नई समिति
दिल्ली सरकार ने निजी तौर पर संचालित संस्थानों के लिए एक नई सात सदस्यीय Admission Regulatory Committee का भी गठन किया है। यह समिति तीन साल की अवधि के लिए काम करेगी।
इसका उद्देश्य निजी संस्थानों से जुड़े दाखिला और नियामक मामलों की निगरानी तथा व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
NOC नियमों में बदलाव की सिफारिश
सब-कमेटी ने संबद्ध संस्थानों को दिए जाने वाले No Objection Certificate (NOC) से जुड़े नियमों में भी बदलाव की सिफारिश की है। इसमें AICTE, Bar Council of India और Council of Architecture जैसे वैधानिक नियामक संस्थानों द्वारा दी गई मंजूरियों को संबंधित मामलों में मान्यता देने का प्रस्ताव रखा गया है।
इन नियामक संस्थाओं के मानकों को संस्थानों की स्वीकृत सीटों, जमीन और निर्मित क्षेत्र से जुड़ी आवश्यकताओं के आकलन का आधार बनाने की भी सिफारिश की गई है।
अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
सब-कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, लेकिन उसका काम अभी पूरा नहीं हुआ है। समिति अपने संदर्भ की बाकी शर्तों की समीक्षा कर रही है और बाद में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
सरकार के मौजूदा फैसले को इसी व्यापक समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल प्राथमिकता खाली सीटों को भरने और संबद्ध कॉलेजों में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर है।
