15 जुलाई 2026 : दिल्ली की एक अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित भीड़ “हिंदुओं के प्रति दुर्भावना (Animus Against Hindus)” के साथ एकत्र हुई थी। अदालत की यह टिप्पणी मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के दौरान प्रस्तुत तथ्यों के संदर्भ में की गई।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले से जुड़े सबूतों, गवाहों के बयानों और अन्य रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण करने के बाद यह निष्कर्ष सामने आया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसका निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के प्रावधानों के आधार पर दिया गया है।
मामला एक चर्चित आपराधिक प्रकरण से जुड़ा है, जिसकी सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया और उसमें यह टिप्पणी दर्ज की।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत की ऐसी टिप्पणियां संबंधित मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों तक सीमित होती हैं। यदि किसी पक्ष को फैसले पर आपत्ति होती है, तो उसे कानून के अनुसार उच्च अदालत में अपील करने का अधिकार प्राप्त है।
