14 सितंबर, 2026 : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई दर्दनाक बिल्डिंग दुर्घटना के बाद पड़ोसी इमारत को गिराने के फैसले को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़ी सुनवाई पहले से ही निर्धारित है, ऐसे में अलग से तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं है।
सत्य निकेतन में ढही थी पांच मंजिला इमारत
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। यह इमारत छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट यानी PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच छात्र भी शामिल थे। घटना के बाद इलाके में मौजूद दूसरी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई।
हादसे के बाद नगर निगम और अन्य एजेंसियों की ओर से आसपास की इमारतों की स्थिति की जांच शुरू की गई। इसी दौरान हादसे वाली इमारत के पास मौजूद एक अन्य संरचना को भी गिराने का फैसला लिया गया।
पड़ोसी इमारत को गिराने के फैसले पर उठे सवाल
MCD की ओर से हादसे के बाद पड़ोसी इमारत को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य आसपास के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि हादसे के बाद बगल की इमारत को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आई थीं।
इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग की गई, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने तत्काल लिस्टिंग से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पड़ोसी इमारत को गिराने से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत के सामने यह मामला उस समय आया जब सत्य निकेतन हादसे के बाद इमारतों की सुरक्षा और MCD की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
अदालत की ओर से तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने का मतलब यह नहीं है कि मामले को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। संबंधित मुद्दे पर न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।
हादसे के बाद MCD की कार्रवाई तेज
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में इमारतों और PG सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। MCD ने कई इमारतों की जांच शुरू की है और भवन निर्माण से जुड़े नियमों, स्वीकृत नक्शे, इमारत में रहने वाले लोगों की संख्या तथा अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
अधिकारियों की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि इमारत का इस्तेमाल स्वीकृत नियमों के अनुसार किया जा रहा था या नहीं। हादसे के बाद अनधिकृत निर्माण और भवनों में किए जा रहे बदलावों को लेकर भी जांच बढ़ाई गई है।
PG और छात्र आवास की सुरक्षा पर भी सवाल
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए उपलब्ध निजी PG और हॉस्टल सुविधाओं की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की सीमित क्षमता के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराये के कमरों पर निर्भर रहते हैं। हादसे के बाद सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की मांग भी तेज हुई है।
दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही इस मामले को लेकर PG और छात्र आवास की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जता चुका है। अदालत के समक्ष दिल्ली में PG सुविधाओं की सुरक्षा जांच और नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं।
हादसे की जांच जारी
सत्य निकेतन हादसे की जांच में पुलिस ने इमारत में हुए निर्माण और मरम्मत कार्यों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की है। पुलिस के अनुसार, हादसे से पहले इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था और वहां मलबा जमा किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने के दौरान एक दीवार हटाई गई थी। हालांकि, हादसे के अंतिम कारणों और जिम्मेदारी को लेकर जांच जारी है।
इस मामले में पुलिस ने इमारत के मालिक और PG संचालन से जुड़े लोगों समेत कई व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की है। मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अभी जारी है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में असुरक्षित और अनधिकृत इमारतों पर कार्रवाई का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है। प्रशासन की ओर से भवनों की सुरक्षा जांच और नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं, पड़ोसी इमारत को गिराने के MCD के फैसले से जुड़ी याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार के बाद अब मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
