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‘दबाव में नहीं आएगा कोर्ट’, चीफ जस्टिस अश्वनी मिश्रा ने पहले दिन कहा- कानून के मुताबिक चलेगा हाईकोर्ट

7 सितंबर 2026  पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने पद संभालने के कुछ ही समय बाद सोमवार को अपने रुख को स्पष्ट कर दिया। पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि अदालत कानून के अनुसार काम करेगी और किसी भी तरह की रणनीति या दबाव से प्रभावित नहीं होगी।

चीफ जस्टिस मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की पीठ के सामने मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने साफ किया कि वह किसी भी पक्ष की दलीलों या दबाव में आकर फैसला नहीं करेगी। उन्होंने संविधान के प्रति लिए गए शपथ का भी उल्लेख किया और कहा कि अदालत का मार्गदर्शन केवल कानून और संविधान से होगा।

शपथ लेने के तुरंत बाद DA मामले की सुनवाई

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। शपथ लेने के दो घंटे के भीतर ही वह पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA/DR भुगतान से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान अदालत की ओर से यह महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई।

मामला हाईकोर्ट के उस पुराने आदेश से जुड़ा है, जिसमें पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA/DR की सभी बकाया किस्तों को 31 अगस्त तक जारी करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने बकाया भुगतान होने तक बड़े पैमाने पर विज्ञापन जैसे गैर-उत्पादक खर्च से बचने को भी कहा था।

कोर्ट ने कहा- कानून के मुताबिक ही होगा फैसला

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दलीलें रखी गईं। इसी दौरान चीफ जस्टिस मिश्रा ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट किसी भी पक्ष के दबाव में नहीं आएगा।

उन्होंने कहा कि अदालत कानून के शासन (Rule of Law) के अनुसार काम करेगी और संविधान की शपथ के मुताबिक अपने कर्तव्य का निर्वहन करेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष की ओर से की गई टिप्पणियों या दबाव का उसके निर्णय पर असर नहीं पड़ेगा।

पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के DA/DR संबंधी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान एक पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने 31 अगस्त के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से बताई गई कुछ खामियों को अभी दूर किया जाना बाकी है।

एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के सामने यह मुद्दा उठाया कि पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार अभी तक अनुपालन संबंधी हलफनामा दाखिल नहीं किया है। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा विज्ञापनों पर खर्च और रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं के लिए जारी की गई राशि का भी उल्लेख किया गया।

कोर्ट ने फिलहाल मामले को आगे सुनने का फैसला किया

हाईकोर्ट ने सोमवार को मामले की विस्तृत सुनवाई तत्काल आगे बढ़ाने के बजाय कहा कि वह केस फाइल देखने के बाद मामले पर सुनवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होने की संभावना है।

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि वह दोनों पक्षों की बात सुनेगी, लेकिन फैसला कानून और रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जाएगा। अदालत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब पंजाब सरकार और हाईकोर्ट के बीच DA/DR भुगतान को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।

नए चीफ जस्टिस का पहले दिन ही स्पष्ट संदेश

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की यह टिप्पणी उनके कार्यकाल के शुरुआती रुख का संकेत मानी जा रही है। पद संभालने के पहले ही दिन उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट किसी भी पक्ष के प्रभाव में नहीं आएगा और न्यायिक प्रक्रिया कानून के मुताबिक आगे बढ़ेगी। इस मामले में अदालत ने सरकार और याचिकाकर्ताओं, दोनों को यह संकेत दिया कि अंतिम निर्णय रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही होगा।

DA विवाद पर आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर मामले की अगली सुनवाई पर है। पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर चुनौती और हाईकोर्ट के अनुपालन संबंधी निर्देशों के बीच यह मामला आगे बढ़ेगा।

फिलहाल हाईकोर्ट ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि अदालत का फैसला किसी दबाव, राजनीतिक बयान या दोनों पक्षों की अतिरिक्त टिप्पणियों के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और संविधान के अनुसार होगा।

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