8 सितंबर 2026: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से जारी Swachh Vayu Sarvekshan 2026 के परिणामों में फरीदाबाद ने दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए बेहतर प्रदर्शन किया है। 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में फरीदाबाद को 14वां स्थान मिला है, जबकि दिल्ली 21वें स्थान पर रही। फरीदाबाद ने इस साल 179.7 अंक हासिल किए।
33 पायदान की छलांग
फरीदाबाद की इस उपलब्धि को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शहर ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। वर्ष 2023 में फरीदाबाद 47वें स्थान पर था। इसके बाद 2024 में यह 21वें और 2025 में 19वें स्थान पर पहुंचा। अब 2026 में शहर ने 14वां स्थान हासिल किया है।
इस तरह चार वर्षों में फरीदाबाद ने कुल 33 पायदान का सुधार किया है।
दिल्ली से आगे निकला फरीदाबाद
इस साल फरीदाबाद ने 179.7 अंक हासिल किए, जबकि दिल्ली को 172 अंक मिले और वह 21वें स्थान पर रही। दिल्ली के साथ विशाखापट्टनम ने भी 21वीं रैंक साझा की।
हालांकि NCR में फरीदाबाद अभी भी गाजियाबाद से पीछे है। गाजियाबाद 184 अंकों के साथ 9वें स्थान पर रहा। वहीं 3 से 10 लाख आबादी वाली अलग श्रेणी में शामिल नोएडा ने 187.5 अंक के साथ अपनी श्रेणी में 8वां स्थान हासिल किया।
फरीदाबाद की रैंकिंग में सुधार की वजह
Swachh Vayu Sarvekshan केवल शहर में मौजूद प्रदूषण के स्तर को नहीं देखता, बल्कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों और उनके क्रियान्वयन का भी आकलन करता है।
फरीदाबाद में प्रदूषण नियंत्रण के लिए सड़क की धूल कम करने, सफाई और सड़क स्वीपिंग बढ़ाने तथा एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल जैसे कदम उठाए गए। नगर निगम ने प्रमुख सड़कों के साथ-साथ छोटी रिहायशी गलियों में भी सफाई अभियान को बढ़ाया।
Namo Van और Eco Van परियोजनाओं पर जोर
शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में भी कई प्रयास किए गए हैं। Namo Van परियोजना के तहत शहर की सीमाओं के आसपास कचरे से प्रभावित ग्रीन बेल्ट को बड़े पैमाने पर पौधारोपण के जरिए शहरी वन क्षेत्र में बदलने का प्रयास किया गया।
इसी तरह Eco Van पहल के तहत रिहायशी इलाकों में खाली जगहों और टाउन पार्कों को अधिक हरित और साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थानों में बदलने पर जोर दिया गया। इन पहलों को शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों का हिस्सा बताया गया है।
वार्ड स्तर पर भी फरीदाबाद को पहचान
फरीदाबाद ने केवल शहर की राष्ट्रीय रैंकिंग में ही बेहतर प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि वार्ड स्तर पर भी पहचान बनाई है। हरियाणा से फरीदाबाद ही ऐसा शहर रहा जिसे Swachh Vayu Sarvekshan के वार्ड-स्तरीय राज्य पुरस्कारों में स्थान मिला।
फरीदाबाद के वार्ड 28 और वार्ड 32 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में पहचान हासिल की, जबकि वार्ड 1 को 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में सम्मान मिला।
सर्वेक्षण में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का आकलन
Swachh Vayu Sarvekshan को केंद्र सरकार के National Clean Air Programme (NCAP) के तहत आयोजित किया जाता है। इसमें सड़क की धूल, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण एवं विध्वंस कचरे, अन्य उत्सर्जन और जन-जागरूकता जैसे क्षेत्रों में शहरों के प्रयासों का मूल्यांकन किया जाता है।
2026 के मूल्यांकन में 130 शहरों को उनकी आबादी के आधार पर तीन श्रेणियों में रखा गया। शहरों की ओर से किए गए स्व-मूल्यांकन के बाद राज्य स्तरीय समितियों की मंजूरी, CPCB के मूल्यांकन और स्वतंत्र समितियों द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बाद रैंकिंग तैयार की गई।
देश में लखनऊ सबसे आगे
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भोपाल और आगरा 192-192 अंकों के साथ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर रहे।
सरकार के अनुसार, 130 NCAP शहरों में से 108 शहरों ने 2025-26 में 2017-18 के आधार वर्ष की तुलना में PM10 स्तर में सुधार दर्ज किया। इनमें 72 शहरों में 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई। 14 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में सफल रहे।
रैंकिंग सुधार से बढ़ी उम्मीद
फरीदाबाद की 14वीं रैंक शहर में वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर किए जा रहे प्रयासों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। हालांकि, यह रैंकिंग सीधे तौर पर यह नहीं बताती कि शहर की हवा हर समय देश की सबसे साफ हवा में शामिल है। सर्वेक्षण मुख्य रूप से वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासनिक और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों तथा उनके क्रियान्वयन का आकलन करता है।
