8 अक्टूबर 2026: पंजाब में अंगदान से जुड़ी एक प्रेरणादायक घटना सामने आई है। मोहाली के एक अस्पताल में ब्रेन-डेड घोषित महिला के परिवार ने दुख की घड़ी में अंगदान का फैसला लिया, जिससे गंभीर लिवर बीमारी से जूझ रहे अहमदगढ़ के एक मरीज को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है। महिला का लिवर फोर्टिस अस्पताल, मोहाली से ग्रीन कॉरिडोर के जरिए लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने कैडेवरिक लिवर ट्रांसप्लांट किया।
ब्रेन हेमरेज के बाद महिला को घोषित किया गया ब्रेन-डेड
महिला की पहचान मधु शर्मा के रूप में हुई है। उन्हें गंभीर सब-अरैक्नॉइड हेमरेज के साथ इंट्रावेंट्रिकुलर हेमरेज हुआ था। अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन-डेड घोषित कर दिया।
परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल समय था, लेकिन उन्होंने अंगदान का फैसला लेकर कई जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद का रास्ता खोल दिया। उनके बेटे के भारतीय सेना में कार्यरत होने की जानकारी भी सामने आई है।
परिवार के फैसले से मरीज को मिला जीवन का नया मौका
मधु शर्मा के परिवार की सहमति के बाद उनके अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई। राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO), पंजाब के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया गया।
DMCH में अहमदगढ़ के एक ऐसे मरीज की पहचान की गई, जो लंबे समय से क्रॉनिक लिवर डिजीज और लिवर फेलियर से जूझ रहा था। उसके परिवार में लिवर डोनेट करने वाला कोई उपयुक्त डोनर उपलब्ध नहीं था। ऐसे में ब्रेन-डेड महिला का अंग उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मोहाली से लुधियाना पहुंचाया गया लिवर
लिवर ट्रांसप्लांट के लिए समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए DMCH की रिट्रीवल टीम मोहाली पहुंची और फोर्टिस अस्पताल की टीम के साथ मिलकर लिवर को सुरक्षित तरीके से निकाला गया।
इसके बाद लिवर को फोर्टिस अस्पताल, मोहाली से DMCH, लुधियाना तक ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पहुंचाया गया। समय पर अंग अस्पताल पहुंचने के बाद DMCH की लिवर ट्रांसप्लांट टीम ने कैडेवरिक लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की।
DMCH की विशेषज्ञ टीम ने किया ट्रांसप्लांट
ट्रांसप्लांट टीम का नेतृत्व DMCH के चीफ लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. गुरसागर सिंह सहोता ने किया। टीम में एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. संगम पापनेजा और क्रिटिकल केयर एवं लिवर ट्रांसप्लांट एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. पीएल गौतम भी शामिल रहे।
DMCH के प्रिंसिपल डॉ. जीएस वांडर ने कहा कि कैडेवरिक ट्रांसप्लांट अस्पताल की उन्नत ट्रांसप्लांट सेवाओं और जटिल मामलों को संभालने की क्षमता को दर्शाता है।
दोनों किडनी भी जरूरतमंद मरीजों को मिलीं
मधु शर्मा के परिवार के अंगदान के फैसले से सिर्फ एक मरीज को ही लाभ नहीं मिला। महिला की दोनों किडनी भी निकाली गईं और उन्हें मोहाली के अन्य अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों के लिए आवंटित किया गया। इस तरह एक परिवार के अंगदान के फैसले से कई मरीजों के जीवन में नई उम्मीद पैदा हुई।
अंगदान से कई मरीजों को मिल सकती है नई जिंदगी
डॉक्टरों ने लोगों से अंगदान के प्रति जागरूक होने की अपील की है। ट्रांसप्लांट टीम के अनुसार, एक अंगदाता कई मरीजों को दूसरी जिंदगी देने में मदद कर सकता है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोना बेहद कठिन होता है, लेकिन ऐसे समय में अंगदान का फैसला दूसरे परिवारों के लिए उम्मीद बन सकता है।
यह मामला भी दिखाता है कि समय पर अंगदान और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जीवन बचाने वाला इलाज मिल सकता है।
कुल मिलाकर, मोहाली में ब्रेन-डेड घोषित मधु शर्मा के परिवार ने अंगदान का सराहनीय फैसला लिया। उनके लिवर को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए DMCH लुधियाना पहुंचाया गया, जहां अहमदगढ़ के लिवर फेलियर से जूझ रहे मरीज का कैडेवरिक लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। उनकी दोनों किडनियां भी मोहाली के अन्य जरूरतमंद मरीजों को आवंटित की गईं। यह घटना अंगदान की अहमियत और एक परिवार के कठिन समय में लिए गए मानवीय फैसले को सामने लाती है।
