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नाबालिग की स्टंटबाजी से मुंबई के दंपती को मारी टक्कर, पति की मौत; हाईकोर्ट ने माता-पिता को भी लगाई फटकार

17 सितंबर, 2026 : मुंबई के विद्या विहार में फरवरी 2026 में हुए सड़क हादसे के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने नाबालिग आरोपी की जमानत रद्द किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने सोशल मीडिया पर सामने आए स्टंट वीडियो और आरोपी के व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह की गतिविधियां दूसरों की जान के लिए खतरा बन सकती हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि घटना के समय नाबालिग पर पर्याप्त माता-पिता का नियंत्रण नहीं था।

SUV की टक्कर में दंपती हुआ था घायल

यह हादसा 5 फरवरी 2026 की रात विद्या विहार में सोमैया कॉलेज के पास हुआ था। पुलिस के अनुसार, उस समय 17 साल 8 महीने का एक नाबालिग कथित तौर पर अपने पिता की SUV चला रहा था। SUV ने स्कूटर सवार दंपती को टक्कर मार दी थी।

हादसे में 33 वर्षीय कारोबारी ध्रुमिल पटेल गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन करीब 10 दिन बाद उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी मीनल भी हादसे में गंभीर रूप से घायल हुईं और उन्हें स्थायी रूप से गंभीर शारीरिक नुकसान हुआ।

सोशल मीडिया पर स्टंट के वीडियो सामने आए

हाईकोर्ट के सामने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े कुछ वीडियो और स्क्रीनशॉट पेश किए गए। अदालत के अनुसार, इनमें आरोपी को दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ स्टंट करते हुए दिखाया गया था।

कुछ वीडियो में कथित तौर पर वाहन की बोनट और विंडस्क्रीन पर लोगों के साथ गाड़ी चलाते हुए और कुछ अन्य वीडियो में बिना हेलमेट के स्कूटर पर स्टंट करते हुए दिखाई देने की बात सामने आई। हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह गतिविधियां किसी एक घटना तक सीमित नजर नहीं आतीं।

हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने का फैसला रखा बरकरार

नाबालिग को पहले जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में सेशन कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी। इसके खिलाफ आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया।

जस्टिस शिवकुमार डिगे की एकल पीठ ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए जमानत रद्द करने के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपी अब वयस्क हो चुका है और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उसे सुधारात्मक गृह में रखना उसके कृत्य की गंभीरता समझने में मदद कर सकता है।

माता-पिता के नियंत्रण को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने आरोपी के माता-पिता की भूमिका को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि घटना के समय नाबालिग पर पर्याप्त parental control नहीं था।

कोर्ट ने चिंता जताई कि यदि ऐसे व्यवहार पर समय रहते रोक नहीं लगाई जाती, तो नाबालिग दोबारा अपने दोस्तों के साथ स्टंट कर सकता है और इससे दूसरे लोगों की जान को खतरा हो सकता है। अदालत ने इस मामले को बच्चों के व्यवहार और उनके ऊपर माता-पिता की निगरानी से भी जोड़कर देखा।

स्टंट वीडियो डिलीट करने को लेकर भी सवाल

हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट से स्टंट से जुड़े वीडियो डिलीट कर दिए गए थे। अदालत ने इसे सबूत नष्ट करने से जुड़ा गंभीर पहलू माना। इस मामले में आरोपी के एक दोस्त के खिलाफ भी इससे संबंधित कार्रवाई का उल्लेख अदालत के सामने हुआ।

हादसे के बाद जमानत की शर्तों का पालन भी नहीं हुआ

अदालत ने आरोपी को मिली जमानत की शर्तों का भी उल्लेख किया। जमानत के दौरान उसे नवी मुंबई के एक निर्धारित स्थान पर रहने के लिए कहा गया था, लेकिन पुलिस की जांच के दौरान वह वहां नहीं मिला। अदालत ने इसे कानूनी आदेशों के प्रति गंभीरता की कमी के रूप में देखा।

एक की मौत, दूसरी पीड़ित हुई गंभीर रूप से प्रभावित

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हादसे में एक व्यक्ति की जान चली गई, जबकि दूसरी पीड़ित गंभीर रूप से प्रभावित हुई। अदालत ने माना कि दोनों पीड़ितों की ओर से ऐसी स्थिति पैदा करने में कोई गलती नहीं थी।

कोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर खतरनाक स्टंट करने की गतिविधियों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है, क्योंकि इनसे न केवल स्टंट करने वाला व्यक्ति बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोग भी खतरे में पड़ते हैं।

सड़क सुरक्षा और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर सवाल

इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, सोशल मीडिया के लिए स्टंट करने और अभिभावकों की निगरानी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। अदालत की टिप्पणी का केंद्र यह था कि नाबालिगों की ऐसी गतिविधियों पर समय रहते नियंत्रण जरूरी है, खासकर जब वे सार्वजनिक सड़कों पर दूसरे लोगों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हों।

मामले में अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए सेशन कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

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