चंडीगढ़ 27 सितंबर, 2026 : पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मनरेगा का नाम बदलने को लेकर भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने योजना का नाम बदलने के साथ ही उसके उन प्रविधानों को भी कमजोर कर दिया है, जिनसे ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलता था।
चीमा ने कहा कि इसका सबसे अधिक असर गरीब, दलित और मजदूर वर्ग पर पड़ रहा है। पत्रकारवार्ता में चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार दावा करती रही है कि केवल योजना का नाम बदला गया है और इसके बाकी प्रविधान पहले जैसे ही हैं।
मजदूरों के लिए कम हुए हैं रोजगार
हालांकि उनके अनुसार ताजा आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। चीमा ने कहा कि योजना के रोजगार पैदा करने वाले कई हिस्सों में बदलाव किए गए हैं, जिसके कारण ग्रामीण मजदूरों के लिए उपलब्ध रोजगार कम हुआ है।
चीमा ने दावा किया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष ग्रामीण रोजगार योजना के तहत करीब 9.56 करोड़ कम दिहाड़ी का रोजगार पैदा हुआ है। पिछले वर्ष करीब 30 करोड़ दिहाड़ी रोजगार उपलब्ध कराया गया था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा घटकर करीब 20.4 करोड़ रह गया है।
केंद्र सरकार ने गरीबों की रोजी-रोटी पर असर डाला है
उन्होंने इसे ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार के अवसरों में बड़ी गिरावट बताया। उन्होंने कहा कि योजना से जुड़े मजदूरों में करीब 87 प्रतिशत अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों से संबंधित हैं।
ऐसे में रोजगार के अवसर घटने का असर इन समुदायों पर अधिक पड़ने का उन्होंने दावा किया। चीमा ने भाजपा पर दलित विरोधी मानसिकता के साथ काम करने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र सरकार के फैसले गरीबों और मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा असर डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने ग्रामीण रोजगार योजना के तहत रोजगार बढ़ाकर 125 दिन करने का वादा किया था, लेकिन रोजगार के अवसर बढ़ाने के बजाय उपलब्ध दिहाड़ी घट गई है।
