12 अक्टूबर 2026: हरियाणा के गुरुग्राम स्थित बादशाहपुर तहसील में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के दौरान बड़ी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आयकर विभाग के सर्वे में पता चला है कि पिछले दो वर्षों में लगभग 25 हजार संपत्तियों के पंजीकरण से जुड़े रिकॉर्ड में एक ही PAN नंबर के इस्तेमाल या गलत PAN दर्ज होने जैसी विसंगतियां पाई गई हैं। इन संपत्तियों से जुड़े लेनदेन का अनुमानित मूल्य करीब 55 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयकर विभाग ने रिकॉर्ड की जांच के लिए सात सदस्यीय टीम गठित की है।
55 हजार करोड़ रुपये के सौदे जांच के दायरे में
आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बादशाहपुर तहसील में संपत्ति लेनदेन की जानकारी और विभाग को उपलब्ध रिकॉर्ड के बीच अंतर सामने आया है। जांच के दौरान लगभग 25 हजार संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ियां मिलीं। इनमें कुछ लेनदेन की जानकारी विभाग को नहीं दी गई थी, जबकि कुछ मामलों में गलत PAN नंबर दर्ज होने की बात सामने आई।
इन संपत्तियों से जुड़े सौदों का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 55 हजार करोड़ रुपये है। विभाग अब संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गड़बड़ियों की वास्तविक प्रकृति और दायरा कितना बड़ा है।
15 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी नहीं मिली
अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 12 हजार संपत्तियों से जुड़े करीब 15 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं मिली थी। इसके बाद दूसरे रिकॉर्ड की जांच में भी कई तरह की विसंगतियां सामने आईं।
विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि संबंधित संपत्ति सौदों की जानकारी रिपोर्ट क्यों नहीं की गई और पंजीकरण के समय PAN नंबरों का सत्यापन किस तरह किया गया। हालांकि, अब तक किसी अधिकारी की संलिप्तता आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुई है।
जांच के लिए सात सदस्यीय टीम गठित
आयकर विभाग के निदेशक (जांच एवं आपराधिक खुफिया जानकारी) ने मामले की पड़ताल के लिए सात सदस्यीय टीम बनाई है। यह टीम बादशाहपुर तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड की जांच कर रही है और लेनदेन से संबंधित आंकड़ों का मिलान कर रही है।
जांच में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की भूमिका भी देखी जा रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि बड़ी रकम वाले संपत्ति सौदों की जानकारी विभाग तक क्यों नहीं पहुंची और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में दर्ज PAN नंबरों की पुष्टि कैसे की गई।
30 लाख रुपये से अधिक के सौदों की जानकारी देना जरूरी
आयकर नियमों के तहत निर्धारित श्रेणी के ऐसे अचल संपत्ति लेनदेन, जिनका मूल्य 30 लाख रुपये से अधिक है, उनकी जानकारी स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस (SFT) के माध्यम से आयकर विभाग को उपलब्ध कराई जानी होती है। इस जानकारी से विभाग को बड़े वित्तीय लेनदेन की निगरानी करने और संबंधित रिकॉर्ड का मिलान करने में मदद मिलती है।
अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा सरकार ने मई 2026 तक का SFT डेटा उपलब्ध कराया था, लेकिन विभाग ने उसकी पूर्णता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। रिपोर्टिंग में किसी तरह की कमी या गलत जानकारी होने पर संपत्ति लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के वित्तीय रिकॉर्ड का सही मिलान करना मुश्किल हो सकता है।
SFT जमा करने में भी सामने आई देरी
रिपोर्ट के मुताबिक, 260 तहसीलदारों की SFT रिपोर्टिंग से संबंधित आंकड़ों में भी देरी सामने आई। इनमें से 140 अधिकारियों ने निर्धारित समय-सीमा से पहले अपनी रिपोर्ट जमा कर दी थी, जबकि 120 अधिकारियों ने समय-सीमा तक रिपोर्ट जमा की।
विभाग अब यह सुनिश्चित करने पर जोर दे रहा है कि संपत्ति के बड़े लेनदेन की जानकारी पूरी और सही तरीके से उपलब्ध कराई जाए। इससे गलत PAN नंबर, छूटे हुए लेनदेन और रिपोर्टिंग संबंधी अन्य विसंगतियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
तकनीकी गड़बड़ी की आशंका भी
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने सवाल उठाया कि हजारों संपत्ति रजिस्ट्रियों में एक ही PAN नंबर का इस्तेमाल कैसे संभव हुआ। अधिकारी ने कंप्यूटर सिस्टम या ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका भी जताई।
हालांकि, यह केवल एक संभावित कारण है। आयकर विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि रिकॉर्ड में गड़बड़ियां तकनीकी समस्या, गलत डेटा एंट्री, रिपोर्टिंग में चूक या किसी अन्य वजह से हुईं। फिलहाल किसी एक कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
बादशाहपुर तहसील में सामने आई विसंगतियों ने बड़े संपत्ति सौदों की रिपोर्टिंग और रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड के सत्यापन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आयकर विभाग रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने में जुटा है कि कितने लेनदेन की जानकारी छूटी और कितने मामलों में गलत PAN नंबर दर्ज हुए।
कुल मिलाकर, गुरुग्राम की बादशाहपुर तहसील में करीब 25 हजार संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आई हैं और लगभग 55 हजार करोड़ रुपये के लेनदेन जांच के दायरे में हैं। आयकर विभाग ने सात सदस्यीय टीम गठित की है। फिलहाल जांच जारी है और किसी अधिकारी की संलिप्तता स्थापित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
