14 सितंबर, 2026 : हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र में ऐतिहासिक हवेलियों और उनमें बनी पारंपरिक फ्रेस्को चित्रकला के संरक्षण की मांग तेज हो गई है। स्थानीय विरासत समूहों ने केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। समूहों का कहना है कि उचित संरक्षण के अभाव में क्षेत्र की पुरानी हवेलियों पर बनी कलाकृतियां धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं।
स्थानीय संगठनों ने हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से केंद्र सरकार तक भी अपनी बात पहुंचाई है। उनकी मांग है कि अहीरवाल की ऐतिहासिक हवेलियों और फ्रेस्को चित्रों को सरकारी संरक्षण और संस्थागत सहायता मिले, जैसा संरक्षण राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियों और चित्रित वास्तुकला को लंबे समय से मिलता रहा है।
रेवाड़ी से महेंद्रगढ़ तक फैली विरासत
अहीरवाल क्षेत्र में रेवाड़ी, नारनौल, महेंद्रगढ़ और दक्षिण गुरुग्राम के कुछ हिस्सों में कई पुरानी हवेलियां मौजूद हैं। इनमें राव तेज सिंह हवेली और राव सवाई सिंह हवेली जैसी ऐतिहासिक इमारतें शामिल हैं। इन हवेलियों की दीवारों पर बनी फ्रेस्को चित्रकला क्षेत्र के इतिहास, धार्मिक परंपराओं और तत्कालीन शासकों की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है।
स्थानीय विरासत समूहों के अनुसार, इन चित्रों और इमारतों का संरक्षण समय रहते नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इस महत्वपूर्ण कला और इतिहास से वंचित हो सकती हैं।
120 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में मौजूद चित्रकला
अहीरवाल हेरिटेज नामक स्थानीय पहल के दस्तावेजीकरण के मुताबिक, दक्षिणी हरियाणा में हवेलियों, घरों और मंदिरों में फैली यह भित्ति चित्रकला 120 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में मौजूद है। इनमें से बड़ी संख्या के चित्र राव तेज सिंह के शासनकाल से जुड़े बताए जाते हैं। राव तेज सिंह का शासनकाल 1798 से 1823 के बीच रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, राव तेज सिंह ने रेवाड़ी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। क्षेत्र की कई ऐतिहासिक इमारतों में आज भी उस दौर की कलात्मक छाप दिखाई देती है।
संरक्षण के लिए स्वयंसेवक कर रहे दस्तावेजीकरण
अहीरवाल की फ्रेस्को कला को बचाने के लिए फिलहाल स्थानीय स्वयंसेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वे पुरानी हवेलियों और दीवारों पर मौजूद चित्रों की तस्वीरें ले रहे हैं और उनका रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं, ताकि इनके पूरी तरह खत्म होने से पहले इनका दस्तावेजीकरण किया जा सके।
स्थानीय संरक्षण कार्यकर्ताओं का कहना है कि विरासत को बचाने के लिए केवल दस्तावेजीकरण पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सरकारी स्तर पर आर्थिक और तकनीकी सहायता के साथ नियमित संरक्षण की आवश्यकता है।
शेखावाटी की तर्ज पर संरक्षण की मांग
स्थानीय विरासत समूहों ने अहीरवाल की फ्रेस्को कला के संरक्षण के लिए राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र का उदाहरण दिया है। शेखावाटी अपनी बड़ी संख्या में मौजूद चित्रित हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है और वहां लंबे समय से विरासत संरक्षण पर ध्यान दिया जाता रहा है।
अहीरवाल के संरक्षण कार्यकर्ताओं का मानना है कि दक्षिणी हरियाणा की ऐतिहासिक हवेलियों को भी इसी तरह संस्थागत संरक्षण और पहचान मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि अहीरवाल की अपनी अलग कलात्मक परंपरा है और इसे केवल राजस्थान की विरासत के विस्तार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
नारनौल की ऐतिहासिक इमारतों पर भी चिंता
नारनौल में छत्ता राय बाल मुकुंद दास की हवेली और त्रिपोलिया गेटवे जैसी ऐतिहासिक संरचनाएं राज्य संरक्षण के दायरे में बताई जाती हैं। हालांकि, विरासत दस्तावेजीकरण से जुड़े लोगों ने इन स्थानों पर अतिक्रमण और उपेक्षा को लेकर चिंता जताई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, नारनौल में केवल तीन स्मारकों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI का संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में स्थानीय विरासत समूहों का मानना है कि क्षेत्र की अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए भी ठोस योजना की जरूरत है।
धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी कला
अहीरवाल की हवेलियों में मौजूद फ्रेस्को चित्रकला केवल सजावट तक सीमित नहीं है। इन चित्रों में क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं और तत्कालीन शासकों की सांस्कृतिक सोच की झलक मिलती है।
स्थानीय दस्तावेजकर्ताओं के अनुसार, यहां की कला शैली अहीर कृष्ण भक्ति परंपरा और राव तेज सिंह तथा राव सवाई सिंह के दरबारी प्रभावों से जुड़ी हुई है। इसलिए इसका संरक्षण क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
युवाओं को अपनी विरासत से जोड़ने की जरूरत
स्थानीय संरक्षणकर्ताओं का कहना है कि विरासत संरक्षण की चुनौती केवल इमारतों तक सीमित नहीं है। नई पीढ़ी को भी इन ऐतिहासिक स्थलों और उनकी कला के बारे में जानकारी देना जरूरी है।
यदि पुरानी हवेलियां और उनके चित्र लगातार नष्ट होते रहे तो आने वाले समय में इस विरासत का वास्तविक स्वरूप समझना मुश्किल हो सकता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता, दस्तावेजीकरण और सरकारी संरक्षण को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई जा रही है।
राव इंद्रजीत सिंह से हस्तक्षेप की उम्मीद
विरासत समूहों ने केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह से सक्रिय पहल की मांग की है। उनकी अपील ऐसे समय में सामने आई है जब अहीरवाल की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षण देने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
स्थानीय समूहों का कहना है कि यदि राज्य और केंद्र सरकार की ओर से उचित संरक्षण और आर्थिक सहायता मिलती है तो पुरानी हवेलियों और फ्रेस्को कला को बचाने के साथ-साथ अहीरवाल की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया जा सकता है।
