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करनाल की मंडियों में धान खरीद पर विवाद, खातों में MSP आने के बाद किसानों से ₹100 से ₹400 प्रति क्विंटल लौटाने की मांग

31 अक्तूबर 2026: हरियाणा के करनाल की अनाज मंडियों में धान खरीद को लेकर विवाद सामने आया है। किसानों का आरोप है कि उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से 100 से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम दर पर खरीदी गई, जबकि सरकारी रिकॉर्ड और बैंक खातों में पूरी MSP राशि जमा दिखाई गई। अब कुछ आढ़तियों की ओर से किसानों से दोनों रकम के बीच का अंतर वापस करने की मांग किए जाने का आरोप है।

किसानों का कहना है कि अधिक नमी का हवाला देकर कम कीमत पर धान खरीदा गया। इसके बावजूद सरकारी भुगतान में पूरी MSP राशि दिखाई गई। इस स्थिति ने मंडियों में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और किसानों को वास्तविक भुगतान मिलने को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

MSP खाते में जमा, फिर पैसे लौटाने की मांग

किसानों के मुताबिक, कुछ मामलों में धान की वास्तविक खरीद MSP से कम कीमत पर हुई। इसके बाद उनके बैंक खातों में पूरी MSP राशि जमा कर दी गई। अब कथित तौर पर आढ़ती उनसे अतिरिक्त जमा हुई रकम वापस मांग रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (सर छोटू राम) के राज्य कोर कमेटी सदस्य जगदीप सिंह औलख ने खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि यदि धान 2,200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाता है तो किसान के खाते में वास्तविक खरीद मूल्य ही जमा होना चाहिए। यदि खरीद MSP पर हुई है, तभी पूरी MSP राशि दी जानी चाहिए।

नमी बताकर कम कीमत पर खरीद का आरोप

किसानों ने आरोप लगाया है कि धान में नमी अधिक होने की बात कहकर MSP से कम कीमत तय की जा रही है। कुछ मामलों में 100 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक का अंतर बताया गया है।

किसान संगठनों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि नमी के कारण खरीद मूल्य में कटौती की गई है, तो बाद में MSP और वास्तविक कीमत के बीच का अंतर वापस मांगने का आधार क्या है। उनका कहना है कि खरीद की दर और भुगतान का पूरा हिसाब स्पष्ट होना चाहिए।

आढ़तियों ने नमी और गुणवत्ता संबंधी नुकसान का दिया हवाला

दूसरी ओर, कुछ आढ़तियों ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए धान में अधिक नमी और गुणवत्ता से जुड़े नुकसान का हवाला दिया है। एक आढ़ती के अनुसार, खराब मौसम की आशंका के बीच कुछ किसान 25 से 30 प्रतिशत तक नमी वाला धान मंडियों में लेकर पहुंचे थे। ऐसे में खरीद और मिलिंग से जुड़े कारोबारियों को नुकसान की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, किसानों और आढ़तियों के दावों के बीच वास्तविक खरीद दर, नमी की मात्रा और भुगतान के अंतर की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

किसानों ने कच्ची पर्चियों पर भी उठाए सवाल

किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकारी रोक के बावजूद कुछ मंडियों में खरीद की मात्रा और दर दर्ज करने के लिए कच्ची पर्चियां जारी की जा रही हैं। इन पर्चियों में कथित तौर पर MSP से कम कीमत का विवरण दर्ज किया जाता है।

भारतीय किसान यूनियन के राज्य अध्यक्ष रतन मान ने किसानों से भुगतान का अंतर वापस न करने की अपील की है। वहीं संगठन के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि नमी के नाम पर की जा रही कटौती का आधार क्या है।

शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेगा प्रशासन

करनाल के उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा है कि अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत मिलने पर प्रशासन कार्रवाई करेगा। उन्होंने किसानों से अपील की कि यदि उन्हें ऐसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है या खरीद और भुगतान में कोई अंतर दिखाई देता है, तो वे प्रशासन को इसकी जानकारी दें।

मामले में अब खरीद की वास्तविक दर, नमी की जांच और किसानों के खातों में जमा राशि के बीच अंतर की पड़ताल अहम होगी। प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंडियों में नियमों का पालन हुआ है या कहीं अनियमितता की गई है।

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