14 अक्टूबर 2026: हरियाणा को नशामुक्त बनाने और युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सात सूत्रीय कार्ययोजना पर काम करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना में नशा तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने, पुलिस की कार्रवाई मजबूत करने, अस्पतालों में इलाज की सुविधा बढ़ाने, स्कूलों में जागरूकता फैलाने और युवाओं को खेलों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार के साथ-साथ परिवारों और समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को संकल्प सोसायटी की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को राज्य में नशे के खिलाफ व्यापक और समन्वित रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। इस सोसायटी का उद्देश्य नशे की रोकथाम, तस्करी के खिलाफ कार्रवाई, उपचार और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाना है। सरकार का जोर केवल नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान करने पर भी है।
हरियाणा सरकार के सात संकल्प
सरकार की पहली प्राथमिकता पुलिस थाना क्षेत्रों को नशामुक्त बनाना है। इसके तहत स्थानीय स्तर पर नशीले पदार्थों की बिक्री और आपूर्ति पर रोक लगाने के लिए पुलिस को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। अधिकारियों को अपने क्षेत्र में नशे से संबंधित गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई करने और स्थानीय लोगों से मिलने वाली सूचनाओं पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरा संकल्प जिलों को नशा तस्करों से मुक्त बनाने का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस की जांच केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, जो नशीले पदार्थ बेचते हुए पकड़ा जाता है। जांच में यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि नशीले पदार्थ कहां से आए, उनकी आपूर्ति कौन कर रहा है और इसके पीछे कौन-सा नेटवर्क काम कर रहा है। तस्करी के रास्तों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निगरानी रखने के साथ आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है।
तीसरी प्राथमिकता मेडिकल स्टोरों के माध्यम से नशीली गोलियों की अवैध बिक्री रोकना है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निगरानी और जांच मजबूत करने की जरूरत होगी, ताकि प्रतिबंधित या नशीले पदार्थों का गलत इस्तेमाल न हो। इस कदम का उद्देश्य दवाओं की वैध बिक्री को प्रभावित किए बिना उनके अवैध वितरण पर रोक लगाना है।
चौथा संकल्प नशे के खिलाफ लड़ाई में परिवारों का सहयोग सुनिश्चित करना है। नशे की लत से प्रभावित व्यक्ति को समय पर मदद दिलाने और उसे उपचार के लिए प्रेरित करने में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सरकार चाहती है कि परिवार प्रभावित युवाओं को अकेला छोड़ने के बजाय उनके इलाज, पुनर्वास और स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में सहयोग करें।
पांचवें संकल्प के तहत अस्पतालों में नशे की लत से प्रभावित लोगों के लिए उपचार सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। केवल नशा छोड़ने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता, काउंसलिंग और उपचार के बाद भी सहयोग उपलब्ध होना चाहिए। संकल्प सोसायटी को यह जानकारी भी जुटानी होगी कि कितने युवाओं को नशामुक्ति केंद्रों तक पहुंचाया गया, कितनों ने उपचार पूरा किया और उपचार के बाद उनकी स्थिति कैसी रही।
छठा संकल्प स्कूलों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता और काउंसलिंग की व्यवस्था मजबूत करना है। विद्यार्थियों को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देना और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना इस पहल का हिस्सा होगा। स्कूलों को ऐसा सुरक्षित माहौल देने पर भी ध्यान देना होगा, जहां विद्यार्थी अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और समय रहते सहायता प्राप्त कर सकें।
सातवां संकल्प युवाओं को खेलों और अन्य सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। मुख्यमंत्री ने मैराथन, साइक्लोथॉन और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। खेलों और रचनात्मक गतिविधियों से युवाओं को अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाने, अनुशासन विकसित करने और नए अवसर तलाशने में मदद मिल सकती है।
हर महीने होगी कार्ययोजना की समीक्षा
मुख्यमंत्री ने संकल्प सोसायटी को हर महीने अपने कामकाज के ठोस परिणाम प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। समीक्षा में यह आकलन किया जाएगा कि नशीले पदार्थों की उपलब्धता कम करने, युवाओं को उपचार से जोड़ने और दोबारा नशे की लत में जाने की आशंका रोकने के लिए क्या प्रगति हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान के हर स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
इस योजना के तहत गृह, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा महिला एवं बाल विकास सहित संबंधित विभागों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा। परिवारों, शिक्षकों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों से भी सहयोग लेने पर जोर दिया गया है।
हरियाणा सरकार की सात सूत्रीय योजना में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, उपचार और पुनर्वास को भी महत्व दिया गया है। अब इसके प्रभावी क्रियान्वयन और हर महीने होने वाली समीक्षा से यह आकलन किया जाएगा कि राज्य में नशे की उपलब्धता घटाने और युवाओं को इससे दूर रखने के प्रयासों में कितनी प्रगति होती है।
