14 अक्टूबर 2026: हरियाणा सरकार राज्य में शहरी विकास को संतुलित बनाने के लिए स्वीडन के सिस्टर सिटी मॉडल का अध्ययन करने जा रही है। इस योजना के तहत कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित किए जाने वाले नए शहरों को पहले से विकसित शहरों के साथ जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य नए शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास करना, निवेश को बढ़ावा देना और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना है। सरकार इस मॉडल को शुरुआती तौर पर लागू करने की योजना बना रही है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल इसी सप्ताह स्वीडन का दौरा करेगा। इस प्रतिनिधिमंडल में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल और संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। दौरे के दौरान स्वीडन में अपनाए जा रहे शहरी विकास के तरीकों, शहरों के बीच सहयोग और प्रशासनिक अनुभवों का अध्ययन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य वहां के सफल प्रयोगों को हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार अपनाने की संभावनाएं तलाशना है।
प्रस्तावित योजना में गुरुग्राम की अहम भूमिका रहने की उम्मीद है। गुरुग्राम हरियाणा का प्रमुख कॉरपोरेट और तकनीकी केंद्र है। यहां आईटी कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े कारोबारी समूहों की मौजूदगी के कारण शहर के पास निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता और शहरी प्रबंधन का व्यापक अनुभव है। सरकार इस अनुभव का इस्तेमाल आसपास के कम विकसित शहरी क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए करना चाहती है।
योजना के तहत विकसित शहरों को ऐसे क्षेत्रों के साथ जोड़ा जा सकता है, जहां बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं में सुधार की जरूरत है। फरीदाबाद और उसके पड़ोसी नूंह जैसे क्षेत्रों को इस तरह की साझेदारी से लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क, सार्वजनिक सुविधाओं, निवेश और प्रशासनिक सेवाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा सकता है।
हरियाणा सरकार KMP एक्सप्रेसवे के आसपास चार नए शहर विकसित करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसी क्षेत्र में सिस्टर सिटी मॉडल को पायलट परियोजना के रूप में लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत गुरुग्राम जैसे विकसित शहर को नए शहरी केंद्रों के विकास में सहयोगी बनाया जा सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे हरियाणा के अन्य हिस्सों में भी लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
स्वीडन में सिस्टर सिटी की अवधारणा को ‘वैनोर्ट’ यानी फ्रेंडशिप टाउन कहा जाता है। इसके तहत दो या अधिक नगरपालिकाएं आपसी सहयोग के माध्यम से विकास से जुड़े अनुभव साझा करती हैं। इस सहयोग में शहरी नियोजन, प्रशासनिक व्यवस्था, सांस्कृतिक गतिविधियां, शिक्षा, पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। इसका मकसद शहरों के बीच लंबे समय तक सहयोग बनाए रखना और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना है।
इस तरह की साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य विकास के अवसरों को कुछ बड़े शहरों तक सीमित रहने से रोकना है। हरियाणा में गुरुग्राम जैसे शहरों ने औद्योगिक, तकनीकी और रियल एस्टेट क्षेत्र में तेजी से विकास किया है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और आर्थिक अवसरों को बढ़ाने की जरूरत बनी हुई है। सरकार चाहती है कि विकसित शहरों के अनुभव और संसाधन आसपास के नए शहरी केंद्रों के विकास में भी काम आएं।
KMP एक्सप्रेसवे को इस योजना के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह हरियाणा के कई क्षेत्रों को जोड़ता है। इसके आसपास नए शहर विकसित होने से आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं हैं। हालांकि, नए शहरों को सफल बनाने के लिए केवल सड़क संपर्क पर्याप्त नहीं होगा। पानी, बिजली, सीवरेज, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और पर्यावरण प्रबंधन जैसी सुविधाओं की भी व्यवस्थित योजना बनानी होगी।
स्वीडन के अनुभव से हरियाणा को हरित तकनीक, टिकाऊ शहरी नियोजन और बेहतर नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में भी सीखने का अवसर मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, शहरों में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना, प्रदूषण कम करना और ऊर्जा का प्रभावी इस्तेमाल करना शहरी विकास की योजना का हिस्सा हो सकता है। इन तरीकों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने से नए शहरों को व्यवस्थित ढंग से विकसित करने में मदद मिल सकती है।
अब सबकी नजर मुख्यमंत्री के स्वीडन दौरे और वहां से मिलने वाले अनुभवों पर रहेगी। प्रस्तावित सिस्टर सिटी मॉडल का वास्तविक स्वरूप, शहरों के बीच सहयोग की शर्तें और इसे लागू करने की समयसीमा आगे की योजना में स्पष्ट हो सकती है। यदि यह पहल सफल रहती है, तो KMP एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित होने वाले नए शहरी केंद्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और हरियाणा में क्षेत्रीय विकास का संतुलन सुधारने में मदद मिल सकती है।
