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हरियाणा में अब रोहतक मॉडल से मजबूत होगी बच्चों की शुरुआती शिक्षा, हर जिले में बनेगी Model Balvatika

30 सितंबर 2026 हरियाणा सरकार बच्चों की शुरुआती और बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए रोहतक की NIPUN Vatika को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी कर रही है। रोहतक में विकसित की गई इस पहल को अब अन्य जिलों के लिए एक संदर्भ मॉडल के तौर पर अपनाया जा रहा है। राज्य के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को इसकी कार्यप्रणाली और सीखने के माहौल को समझने के लिए रोहतक का दौरा कराया जाएगा।

हर जिले में बनेगी Model Balvatika

हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) की ओर से 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के दौरान प्रत्येक जिले में एक Model Balvatika स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। अधिकारियों को रोहतक की NIPUN Vatika का अध्ययन कर अपने-अपने जिलों में इसी तरह की सुविधाएं विकसित करने के लिए कहा गया है।

इसके लिए जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों (DEEOs) और फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी कोऑर्डिनेटर्स (FLNCs) को विशेष कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा गया है। इस दौरान अधिकारी NIPUN Vatika की योजना, संरचना, गतिविधियों और बच्चों के लिए तैयार किए गए सीखने के वातावरण को समझेंगे।

खेल और गतिविधियों के जरिए सीखते हैं बच्चे

रोहतक की NIPUN Vatika को बच्चों के लिए एक रचनात्मक और गतिविधि आधारित सीखने की जगह के रूप में विकसित किया गया है। यहां शैक्षणिक खिलौनों, इंटरैक्टिव लर्निंग टूल्स और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने का अवसर मिलता है।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों के लिए शिक्षा को केवल किताबों और रटने तक सीमित न रखकर उसे आनंददायक, अनुभव आधारित और अवधारणा-केंद्रित बनाना है। बच्चों को देखने, समझने, प्रयोग करने और गतिविधियों के माध्यम से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

NIPUN Vatika को मिला राज्य स्तर पर मॉडल का दर्जा

रोहतक में NIPUN Vatika की शुरुआत सितंबर 2025 में की गई थी। इसके बाद पहल को राज्य स्तर पर पहचान मिली और हरियाणा सरकार ने इसे अन्य जिलों में Model Balvatika विकसित करने के लिए संदर्भ मॉडल के रूप में स्वीकार किया।

पहले चरण में प्रत्येक जिले को Model Balvatika स्थापित करने के लिए 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

भाषा और गणित की बुनियाद मजबूत करने पर जोर

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य बच्चों में शुरुआती स्तर पर Foundational Literacy and Numeracy (FLN) को मजबूत करना है। यानी बच्चों को शुरुआती कक्षाओं में पढ़ने, लिखने और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने में मदद करना।

हरियाणा का NIPUN Haryana Mission भी इसी लक्ष्य पर केंद्रित है। राज्य सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे तीसरी कक्षा तक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता हासिल कर सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ा मॉडल

Model Balvatika की अवधारणा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और National Curriculum Framework for Foundational Stage 2022 के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों के शुरुआती वर्षों में उनकी सीखने की क्षमता और बुनियादी कौशल को मजबूत करना है।

शुरुआती उम्र में मजबूत शैक्षणिक आधार तैयार होने से बच्चों को आगे की कक्षाओं में पढ़ाई समझने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से हरियाणा सरकार फाउंडेशनल स्टेज की शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है।

शिक्षा अधिकारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण और अनुभव

रोहतक में होने वाले एक्सपोजर विजिट और ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जिलों के अधिकारी NIPUN Vatika की व्यवस्था को करीब से समझेंगे। वे यह देखेंगे कि बच्चों के लिए गतिविधियों का चयन कैसे किया गया है और सीखने के वातावरण को किस तरह तैयार किया गया है।

अधिकारियों के बीच अनुभव और विचारों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा, ताकि अलग-अलग जिलों में Model Balvatika विकसित करते समय स्थानीय जरूरतों के अनुसार जरूरी बदलाव किए जा सकें।

CSR की मदद से तैयार हुई थी NIPUN Vatika

रोहतक की NIPUN Vatika को तैयार करने में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंडिंग का भी सहयोग लिया गया था। इस पहल को रोहतक के अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) नरेंद्र कुमार की परिकल्पना से विकसित किया गया।

अब राज्य सरकार की ओर से इसे व्यापक स्तर पर अपनाने की तैयारी की जा रही है, जिससे रोहतक की यह पहल प्रदेश के अन्य जिलों में भी शुरुआती शिक्षा को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल हो सके।

हर जिले में बच्चों के लिए बेहतर सीखने का माहौल

हरियाणा सरकार की योजना के तहत Model Balvatika के माध्यम से बच्चों को शुरुआती स्तर पर ऐसा वातावरण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, जहां वे खेल, गतिविधियों और प्रयोगों के जरिए सीख सकें।

इससे फाउंडेशनल लर्निंग को मजबूत करने के साथ-साथ बच्चों में भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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