29 सितंबर 2026 अपने 18 वर्षीय बेटे को खोने का दुख किसी भी मां-बाप के लिए बेहद मुश्किल होता है, लेकिन मुंबई के KEM अस्पताल की प्रोफेसर डॉ. करुणा नाडकर्णी ने इस कठिन समय में ऐसा फैसला लिया, जिसने कई परिवारों को नई उम्मीद दे दी। सड़क हादसे के बाद करीब तीन साल तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने वाले उनके बेटे सौमिल के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने उसके अंगदान का फैसला किया। सौमिल के हृदय, लिवर, किडनी और कॉर्निया से सात लोगों को नई जिंदगी और रोशनी की उम्मीद मिली।
सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ जिंदगी का संघर्ष
सौमिल जब 11वीं कक्षा में पढ़ रहा था, तब उसका सड़क हादसा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर वह एक दोपहिया वाहन पर पीछे बैठा था, तभी एक ऑटोरिक्शा की टक्कर हो गई। हादसे में उसके दिमाग को गंभीर चोट लगी थी।
इस दुर्घटना के बाद सौमिल के शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी और मूवमेंट की समस्या हो गई थी। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी। परिवार के मुताबिक, कई सर्जरी और लंबे इलाज के बीच भी वह मुस्कुराता रहता था और जिंदगी के लिए लगातार संघर्ष करता रहा। उसका सपना इंजीनियर बनने का था।
तीन साल तक इलाज और कई सर्जरी
हादसे के बाद सौमिल का इलाज लंबे समय तक चला। वह कुछ हद तक चलने में सक्षम हो गया था और मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। शुरुआती इलाज के दौरान उसकी खोपड़ी के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने के लिए क्रैनियोप्लास्टी की गई थी।
इसके बाद इस साल उसके दिमाग में संक्रमण हो गया। संक्रमण के कारण क्रैनियोप्लास्टी में लगाई गई प्लेट को हटाना पड़ा। लगभग तीन महीने तक उसे एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज दिया गया। इसके बाद पिछले सप्ताह उसकी दोबारा सर्जरी की गई।
सर्जरी के बाद बिगड़ी स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, दोबारा सर्जरी के बाद सौमिल की हालत अचानक गंभीर हो गई। उसके ब्रेनस्टेम को गंभीर नुकसान पहुंचा और डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
फोर्टिस अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, सौमिल को 26 सितंबर को ब्रेन डेड घोषित किया गया था। इसके बाद परिवार के सामने उसके अंगदान का फैसला लेने की स्थिति आई। मां डॉ. करुणा नाडकर्णी खुद चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी हैं और KEM अस्पताल में ऑक्यूपेशनल थेरेपी की प्रोफेसर हैं। ऐसे कठिन समय में उन्होंने अंगदान के महत्व को समझते हुए परिवार के साथ मिलकर यह निर्णय लिया।
सौमिल के अंगों से सात लोगों को मिली उम्मीद
परिवार की सहमति के बाद सौमिल के अंगों को जरूरतमंद मरीजों के लिए दान किया गया। उसके हृदय, लिवर, दोनों किडनी और कॉर्निया का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, उसका लिवर दो मरीजों के लिए इस्तेमाल किया गया। इसे विभाजित कर एक हिस्सा 67 वर्षीय महिला और दूसरा हिस्सा छह वर्षीय बच्चे में ट्रांसप्लांट किया गया। वहीं उसका हृदय 15 वर्षीय लड़के को प्रत्यारोपित किया गया। एक किडनी 64 वर्षीय मुलुंड निवासी को दी गई, जबकि दूसरी किडनी दूसरे अस्पताल के मरीज के लिए आवंटित की गई। उसकी कॉर्निया भी दान की गईं।
इस तरह एक परिवार के बेहद कठिन फैसले ने कई दूसरे परिवारों में उम्मीद की किरण पैदा की। सौमिल के अंगों ने उन मरीजों को जिंदगी का नया मौका दिया, जो लंबे समय से प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे थे।
मां ने अपनी सीख को किया हकीकत में तब्दील
डॉ. करुणा नाडकर्णी के लिए यह फैसला केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं था। अपने बेटे को खोने के दर्द के बीच उन्होंने उस ज्ञान और सीख को व्यवहार में उतारा, जिसे वह वर्षों से दूसरों को समझाती रही थीं।
उन्होंने कहा कि सौमिल उनके लिए बेहद कीमती था, लेकिन उसके अंगों के जरिए दूसरे लोगों को जिंदगी मिलना परिवार के लिए एक तरह की सांत्वना है। उनके फैसले ने यह भी दिखाया कि अंगदान किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके जीवन को दूसरे लोगों के बीच आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।
मुंबई में इस साल का 47वां कैडेवरिक अंगदान
रिपोर्ट के अनुसार, सौमिल का अंगदान मुंबई में इस साल का 47वां कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन था। फोर्टिस अस्पताल, मुलुंड के लिए भी यह 2026 में 10वां कैडेवरिक अंगदान बताया गया है।
अंगदान की पूरी प्रक्रिया में अस्पताल की मेडिकल टीम, नर्सिंग स्टाफ, मेडिकल सोशल वर्कर्स और जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (ZTCC), मुंबई की भूमिका रही। दाता और प्राप्तकर्ता अस्पतालों के बीच समन्वय के जरिए अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया गया।
एक परिवार का फैसला, कई परिवारों के लिए उम्मीद
सौमिल की कहानी सड़क हादसे, लंबे इलाज और एक परिवार के गहरे दुख की कहानी है, लेकिन इसके साथ यह अंगदान की अहमियत को भी सामने लाती है। एक तरफ परिवार ने अपने 18 वर्षीय बेटे को खो दिया, वहीं दूसरी तरफ उसके अंगों के जरिए कई मरीजों को जिंदगी का नया अवसर मिला।
ऐसे मामलों में परिवार के लिए फैसला लेना बेहद भावनात्मक होता है। सौमिल के माता-पिता ने इस मुश्किल घड़ी में अंगदान की सहमति देकर कई जरूरतमंद मरीजों की जिंदगी बदलने में योगदान दिया।
