25 सितंबर 2026 श्री गुरु नानक देव जी के श्रद्धालु और सिख इतिहास में ईमानदार मेहनत के प्रतीक माने जाने वाले भाई लालो जी का जन्म दिवस अमृतसर में श्रद्धा और धार्मिक भावना के साथ मनाया गया। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से यह धार्मिक कार्यक्रम दरबार साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगत ने हिस्सा लिया।
श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद कार्यक्रम
भाई लालो जी के जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद हुई। इसके बाद श्री हरमंदिर साहिब के हजूरी रागी गुरदेव सिंह और उनके जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया।
कार्यक्रम के दौरान भाई प्रेम सिंह ने अरदास की। इसके बाद कथावाचक ज्ञानी विशाल सिंह ने पवित्र हुकमनामा सुनाया और संगत को भाई लालो जी के जीवन तथा उनकी शिक्षाओं के बारे में जानकारी दी।
भाई लालो जी का जीवन समाज के लिए प्रेरणा
ज्ञानी विशाल सिंह ने कहा कि भाई लालो जी का जीवन समाज के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। उनका जीवन लोगों को ईमानदारी से मेहनत करके आजीविका कमाने और परमात्मा से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने बताया कि श्री गुरु नानक देव जी ने भाई लालो जी को सम्मान देकर मानवता को सच्ची और ईमानदार मेहनत का संदेश दिया। भाई लालो जी का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि व्यक्ति अपनी मेहनत से कमाई करे और अपने जीवन में सच्चाई तथा धार्मिक मूल्यों को महत्व दे।
‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ का संदेश
कार्यक्रम के दौरान संगत से गुरु साहिब द्वारा दिए गए सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की गई। इसमें ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ का संदेश प्रमुख रहा।
इसका अर्थ ईमानदारी से मेहनत करना, परमात्मा का नाम जपना और अपनी कमाई तथा संसाधनों को जरूरतमंदों के साथ साझा करना है। भाई लालो जी का जीवन इन सिद्धांतों के साथ जोड़कर देखा जाता है और उनके जन्म दिवस पर भी संगत को इन्हीं मूल्यों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
धार्मिक कार्यक्रम में SGPC से जुड़े पदाधिकारी भी पहुंचे
समागम में SGPC के धर्म प्रचार कमेटी के सुपरिंटेंडेंट मलकीत सिंह बहिड़वाल और श्री दरबार साहिब के अतिरिक्त मैनेजर बिक्रमजीत सिंह झंगी सहित कई लोग मौजूद रहे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी कार्यक्रम में पहुंचकर भाई लालो जी को श्रद्धा से याद किया।
भाई लालो जी की शिक्षाओं को आगे बढ़ाने पर जोर
भाई लालो जी का जन्म दिवस केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके जीवन से जुड़ी शिक्षाओं को याद करने और उन्हें वर्तमान जीवन में अपनाने का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में ईमानदार मेहनत, सच्चाई, आध्यात्मिक जुड़ाव और दूसरों के साथ बांटकर खाने जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया।
सिख परंपरा में भाई लालो जी को गुरु नानक देव जी के ऐसे श्रद्धालु के रूप में याद किया जाता है, जिनका जीवन मेहनत और सच्ची कमाई के संदेश से जुड़ा हुआ है। उनके जीवन से संबंधित प्रसंगों के माध्यम से गुरु नानक देव जी ने समाज को ईमानदारी और श्रम का महत्व समझाया था।
संगत ने श्रद्धा के साथ लिया हिस्सा
अमृतसर स्थित दरबार साहिब परिसर में हुए इस कार्यक्रम के दौरान संगत ने गुरबाणी कीर्तन और अरदास में हिस्सा लिया। धार्मिक वातावरण के बीच भाई लालो जी के जीवन और उनके आदर्शों को याद किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संगत से अपील की गई कि वे अपने दैनिक जीवन में मेहनत, ईमानदारी, आध्यात्मिकता और जरूरतमंदों की मदद जैसे मूल्यों को अपनाएं।
आज भी प्रासंगिक हैं भाई लालो जी की शिक्षाएं
भाई लालो जी की शिक्षाओं को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक माना जाता है। ईमानदारी से आजीविका कमाना, मेहनत का सम्मान करना और अपनी कमाई में से दूसरों के साथ बांटना ऐसे मूल्य हैं जो सामाजिक जीवन में सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।
उनके जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के माध्यम से भी इन्हीं मूल्यों को याद किया गया और संगत को गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई।
