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दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 साल पुरानी जांच में पुलिस की जवाबदेही पर उठाए सवाल

21 सितंबर, 2026 : दिल्ली हाईकोर्ट ने करीब नौ साल पुरानी पुलिस जांच में हुई देरी और अदालत के निर्देशों के कथित अनुपालन न होने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर, संबंधित सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) और जांच अधिकारी (Inspector) से जवाब मांगा है। तीनों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई फरवरी 2027 में होगी।

2016 में दर्ज हुई थी FIR

यह मामला साल 2016 में दर्ज की गई FIR से जुड़ा है। FIR भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 509 के तहत दर्ज हुई थी। यह धारा किसी महिला की मर्यादा का अपमान करने से संबंधित अपराधों पर लागू होती थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच लंबे समय तक पूरी नहीं हुई। आरोपी की ओर से मामला रद्द करने की मांग को लेकर अदालत का रुख किए जाने के दौरान भी जांच अधिकारी ने कथित तौर पर आवश्यक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की थी।

9 साल तक जांच पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में ही जांच अधिकारी के कामकाज पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने संबंधित ACP को जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद पुलिस ने अदालत को बताया था कि विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि, बाद की प्रक्रिया में भी कथित तौर पर अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद पांच बाद की सुनवाइयों में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई।

अदालत के आदेश पर भी अनुपालन रिपोर्ट नहीं हुई दाखिल

मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी सामने आया कि जब अदालत ने विभागीय जांच के निर्देश दिए थे, तो पुलिस की ओर से उसकी प्रगति की जानकारी समय पर क्यों नहीं दी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में मूल मामला समाप्त होने के बाद भी अदालत को विभागीय कार्रवाई की स्थिति के बारे में कथित तौर पर सूचित नहीं किया गया। इस वजह से हाईकोर्ट ने अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगने का फैसला किया है।

चार्जशीट पर भी सामने आया नया मोड़

मामले में पुलिस की ओर से चार्जशीट भी दाखिल की गई थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने कथित तौर पर उस चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया और संबंधित DCP को जांच अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

इस घटनाक्रम ने जांच प्रक्रिया और संबंधित पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर अदालत के सामने एक और सवाल खड़ा किया।

पुलिस कमिश्नर समेत तीन अधिकारियों को नोटिस

अब हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर, संबंधित ACP और जांच अधिकारी को नोटिस जारी किया है। अदालत ने तीनों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

इस कार्रवाई का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि अदालत के पहले के निर्देशों पर अपेक्षित कार्रवाई क्यों नहीं हुई और लंबे समय तक जांच लंबित रहने की स्थिति कैसे बनी।

मामला सिर्फ देरी तक सीमित नहीं

इस मामले में अदालत के सामने अब केवल नौ साल तक चली जांच का मुद्दा नहीं है, बल्कि पुलिस के आंतरिक निगरानी तंत्र और अदालत के निर्देशों के अनुपालन का सवाल भी सामने आया है।

अदालत यह देख रही है कि जब किसी जांच अधिकारी के कामकाज पर पहले ही सवाल उठ चुके हों और विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हों, तो वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में उस प्रक्रिया को समय पर पूरा क्यों नहीं किया गया।

अगली सुनवाई फरवरी 2027 में

दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई फरवरी 2027 में निर्धारित की गई है।

अदालत के सामने अधिकारियों के जवाब आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि जांच और विभागीय कार्रवाई में हुई देरी को लेकर पुलिस का क्या पक्ष है।

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