21 सितंबर, 2026 : बिहार के गया निवासी नीरज ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए अमृतसर से लापता हुए लुधियाना के बुजुर्ग चमन लाल को उनके परिवार से मिलवा दिया। चमन लाल अमृतसर की यात्रा के दौरान अपने समूह से अलग हो गए थे और गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए थे। इसके बाद वह गया पहुंच गए, जहां नीरज ने उन्हें देखा और उनकी मदद करने का फैसला किया।
अमृतसर यात्रा के दौरान परिवार से बिछड़े चमन लाल
चमन लाल लुधियाना जिले के फतेहगढ़ गुजरां गांव के रहने वाले हैं। परिवार के मुताबिक, वह 11 सितंबर को पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए गए थे।
यात्रा के दौरान वह अपने साथ गए लोगों से अलग हो गए। इसके बाद वह अमृतसर रेलवे स्टेशन की ओर पहुंच गए और गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गए। ट्रेन से सफर करते हुए वह गया पहुंच गए। परिवार को काफी समय तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
गया में नीरज ने बुजुर्ग को देखा
गया रेलवे स्टेशन के आसपास नीरज की नजर चमन लाल पर पड़ी। वह बुजुर्ग को परेशान और अकेले हालत में देखकर समझ गए कि शायद वह रास्ता भटक गए हैं। चमन लाल अपना पूरा पता नहीं बता पा रहे थे और उन्हें अपने गांव के नाम के अलावा ज्यादा जानकारी याद नहीं थी।
नीरज ने चमन लाल को अपने घर ले जाकर खाना और रहने की जगह दी। वह करीब चार दिन तक उनके घर पर रहे। इस दौरान नीरज लगातार उनके परिवार और गांव का पता लगाने की कोशिश करते रहे।
गांव का नाम बना परिवार तक पहुंचने का जरिया
चमन लाल को अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरां याद था। इसी जानकारी को आधार बनाकर नीरज ने इंटरनेट पर खोज शुरू की। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब तीन दिन तक अलग-अलग तरीके से इंटरनेट और ChatGPT की मदद से गांव की पहचान करने की कोशिश की।
आखिरकार उन्हें पता चला कि फतेहगढ़ गुजरां गांव पंजाब के लुधियाना जिले में, माछीवाड़ा साहिब के पास स्थित है। इसके बाद नीरज ने बुजुर्ग को अकेले वापस भेजने के बजाय खुद उनके साथ पंजाब जाने का फैसला किया।
नीरज खुद चमन लाल को लेकर पंजाब पहुंचे
गांव की जानकारी मिलने के बाद नीरज चमन लाल को अपने साथ लेकर गया से पंजाब के लिए रवाना हुए। लुधियाना पहुंचने के बाद उन्होंने माछीवाड़ा इलाके में स्थानीय लोगों से चमन लाल के गांव के बारे में पूछताछ शुरू की।
नीरज ने चमन लाल की तस्वीर भी लोगों को दिखाई। इसी दौरान एक स्थानीय व्यक्ति मास्टर कृष्ण लाल ने उन्हें पहचान लिया। उन्होंने चमन लाल की तस्वीर पहले सोशल मीडिया पर देखी थी, क्योंकि परिवार और ग्रामीण उनकी तलाश के दौरान उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे थे।
पोते ने दादा को देखते ही लगाया गले
मास्टर कृष्ण लाल ने चमन लाल के परिवार से संपर्क किया। इसके बाद उनके पोते सुखचैन सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपने दादा की पहचान की।
कई दिनों से परिवार से दूर रहे चमन लाल को सुरक्षित देखकर परिवार की आंखों में आंसू आ गए। सुखचैन सिंह ने नीरज का आभार जताया और उन्हें गले लगाया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने नीरज के पैर छूकर भी उनका धन्यवाद किया।
परिवार लगातार चमन लाल की तलाश कर रहा था। उनके पोते सुखचैन सिंह ने बताया कि वह 13 सितंबर को अमृतसर गए थे और वहां कई जगहों पर अपने दादा को तलाश किया था, लेकिन उनका पता नहीं चल सका था।
नीरज ने कहा- बस परिवार तक पहुंचाना चाहता था
नीरज ने बताया कि जब उन्होंने चमन लाल को अकेले देखा तो उनका उद्देश्य सिर्फ उनके परिवार का पता लगाना था। उन्होंने बुजुर्ग को अपने घर में रखा और जब गांव की पहचान हो गई तो उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने का फैसला किया।
इस पूरी घटना में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर साझा की गई जानकारी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिवार द्वारा चमन लाल की तस्वीर ऑनलाइन साझा किए जाने से स्थानीय व्यक्ति उन्हें पहचान सका और परिवार तक सूचना पहुंचाना संभव हुआ।
इंसानियत की मिसाल बनी घटना
अमृतसर से शुरू हुई चमन लाल की यात्रा उन्हें बिहार के गया तक ले गई, लेकिन एक अनजान व्यक्ति की मदद के कारण वह आखिरकार अपने परिवार तक वापस पहुंच सके। नीरज ने न केवल उन्हें अपने घर में जगह दी, बल्कि उनकी पहचान और गांव का पता लगाने के बाद खुद पंजाब तक साथ आकर उन्हें परिवार के हवाले किया।
चमन लाल के परिवार ने नीरज का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस घटना ने दिखाया है कि मुश्किल समय में इंसानियत आज भी जिंदा है।
