19 सितंबर, 2026 : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि राज्य में नहरी सिंचाई के विस्तार और पानी के बेहतर इस्तेमाल से कई इलाकों में भूजल स्तर में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई ब्लॉकों में जलस्तर एक से पांच मीटर तक ऊपर आया है। मुख्यमंत्री ने यह बात पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले के उद्घाटन के दौरान कही।
नहरी सिंचाई का इस्तेमाल बढ़ने का दावा
मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुसार, 16 मार्च 2022 को पंजाब में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी में नहरी पानी की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत थी। अब यह बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से खेती के लिए भूजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।
मान ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पंजाब में पानी की उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी मिल सके और भूजल पर लगातार बढ़ता दबाव कम हो।
14 हजार किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने की बात
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों के दौरान राज्य में करीब 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई हैं। इन पाइपलाइनों के जरिए नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए सिंचाई नेटवर्क का विस्तार किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले समय में इस नेटवर्क को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। उनके अनुसार, अतिरिक्त 7,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे नहरी सिंचाई का कवरेज और बढ़ाया जा सके।
कई ब्लॉकों में जलस्तर बढ़ने का दावा
भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से किए गए विभिन्न उपायों के कारण पंजाब के कई ब्लॉकों में भूजल स्तर में एक से पांच मीटर तक सुधार दर्ज किया गया है। उनके अनुसार, नहरी पानी के बढ़ते इस्तेमाल और भूमिगत जल पर निर्भरता कम करने के प्रयासों का असर जलस्तर पर दिखाई दे रहा है।
हालांकि, पंजाब में भूजल संकट अभी भी एक बड़ी चुनौती है। हालिया आकलनों के अनुसार राज्य के कई भूजल ब्लॉक अत्यधिक दोहन की श्रेणी में हैं। ऐसे में नहरी सिंचाई का विस्तार भूजल संरक्षण की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
खेतों तक नहरी पानी पहुंचाने पर जोर
सरकार का फोकस केवल मुख्य नहरों तक पानी पहुंचाने के बजाय खेतों के अंतिम छोर तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने पर भी है। पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार का उद्देश्य पानी के वितरण को अधिक प्रभावी बनाना और उन क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचाना है जहां पहले सिंचाई के लिए भूजल पर ज्यादा निर्भरता थी।
मुख्यमंत्री ने किसान मेले में किसानों के हितों और खेती को आधुनिक तथा लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया।
पंजाब में भूजल संरक्षण क्यों जरूरी
पंजाब लंबे समय से कृषि क्षेत्र में भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल की चुनौती का सामना कर रहा है। धान जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों की खेती के कारण कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल के जरिए भूजल निकालने पर निर्भरता बढ़ी है।
ऐसे में नहरों और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई का विस्तार किसानों को वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध करा सकता है। इससे लंबे समय में भूजल दोहन को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है।
नहरी नेटवर्क को और बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार सिंचाई नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार की योजना अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाकर नहरी पानी की पहुंच को अधिक खेतों तक बढ़ाने की है।
पंजाब में नहरी सिंचाई को बढ़ावा देने के साथ-साथ पानी के संरक्षण और कृषि को टिकाऊ बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य किसानों को सिंचाई के लिए अधिक भरोसेमंद जल स्रोत उपलब्ध कराना है।
किसान मेले में किसानों से संवाद
PAU में आयोजित किसान मेले के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से कृषि से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद किया। उन्होंने किसानों के हितों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और खेती को आधुनिक तथा लाभकारी बनाने की बात कही।
