19 सितंबर, 2026 : पंजाब के कपूरथला की 13 वर्षीय एथलीट जैपजीत कौर ने खेल के मैदान में शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम रोशन किया है। जैपजीत ने 37वीं नॉर्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उन्होंने प्रतियोगिता में 38.37 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर दूसरा स्थान हासिल किया।
जैपजीत कौर की इस उपलब्धि से उनके परिवार, स्कूल और कपूरथला के खेल प्रेमियों में खुशी का माहौल है। कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर की जूनियर प्रतियोगिता में पदक जीतना उनके अब तक के खेल सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
38.37 मीटर दूर फेंका भाला
जैपजीत ने नॉर्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप के जैवलिन थ्रो इवेंट में 38.37 मीटर का शानदार थ्रो दर्ज किया। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने सिल्वर मेडल हासिल किया। यह प्रतियोगिता जूनियर स्तर के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
भारतीय एथलेटिक्स फेडरेशन के अनुसार 37वीं नॉर्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 14 से 16 सितंबर 2026 तक आयोजित हुई, जिसमें अलग-अलग आयु वर्गों और स्पर्धाओं में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
Christ the King Convent School की छात्रा हैं जैपजीत
जैपजीत कौर Christ the King Convent School, Lodhi Bhulana, Kapurthala की छात्रा हैं। पढ़ाई के साथ-साथ वह नियमित रूप से एथलेटिक्स की ट्रेनिंग करती हैं।
उनके परिवार का भी खेलों से पुराना जुड़ाव है। उनके पिता बिक्रमजीत सिंह एक स्पोर्ट्स कॉलेज में एथलेटिक्स कोच हैं, जबकि उनकी मां अमनप्रीत कौर अंतरराष्ट्रीय स्तर की डिस्कस थ्रोअर रह चुकी हैं। ऐसे में जैपजीत को बचपन से ही खेलों का माहौल मिला।
नौ साल की उम्र से शुरू की ट्रेनिंग
रिपोर्ट के अनुसार जैपजीत ने करीब नौ साल की उम्र में औपचारिक खेल प्रशिक्षण शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने एथलेटिक्स में लगातार मेहनत की और अलग-अलग प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए।
कम उम्र में लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने और प्रदर्शन में सुधार करने से उनके खेल करियर में तेजी से प्रगति देखने को मिली है। वर्तमान में वह अपनी फिटनेस और जैवलिन थ्रो की तकनीक पर विशेष ध्यान दे रही हैं।
सतनाम सिंह के मार्गदर्शन में कर रही हैं अभ्यास
जैपजीत इस समय कपूरथला स्थित रेल कोच फैक्ट्री के फिटनेस कोच सतनाम सिंह के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग कर रही हैं। उनकी ट्रेनिंग में ताकत, फिटनेस और जैवलिन थ्रो की तकनीक को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।
जैवलिन थ्रो में केवल ताकत ही नहीं बल्कि तकनीक, शरीर का संतुलन, रन-अप और सही समय पर भाला छोड़ने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में कम उम्र से नियमित प्रशिक्षण उनके खेल कौशल को विकसित करने में मदद कर रहा है।
परिवार में पहले से है खेलों का माहौल
जैपजीत की खेल उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उनके दादा गुरपाल सिंह रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं और पूर्व राष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ी रह चुके हैं। उन्होंने 1966 में Sports College, Jalandhar से पढ़ाई की थी और लंबे समय से खेल गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
उनके पिता एथलेटिक्स कोच हैं और मां अंतरराष्ट्रीय स्तर की डिस्कस थ्रोअर रही हैं। ऐसे खेल परिवार में रहने से जैपजीत को खेलों के प्रति शुरुआती उम्र से ही प्रोत्साहन मिला।
पढ़ाई पर भी दे रही हैं ध्यान
खेल के साथ-साथ जैपजीत अपनी पढ़ाई को भी महत्व देती हैं। उनके पिता के अनुसार वह पढ़ाई और नियमित एथलेटिक्स ट्रेनिंग के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, वह काफी हद तक सेल्फ-स्टडी पर निर्भर रहती हैं और खेल अभ्यास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखती हैं। यह उनके खेल और शिक्षा दोनों को साथ लेकर चलने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कम उम्र में बड़ी उपलब्धि
13 साल की उम्र में नॉर्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतना जैपजीत के लिए एक अहम उपलब्धि है। 38.37 मीटर के थ्रो के साथ उन्होंने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
अब उनकी नजर आगे होने वाली प्रतियोगिताओं में अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने पर होगी। नियमित प्रशिक्षण, फिटनेस और तकनीक में सुधार के साथ जैपजीत भविष्य में एथलेटिक्स के क्षेत्र में आगे बढ़ने का लक्ष्य रख सकती हैं।
