• Sat. Sep 19th, 2026

अमृतसर में स्टांप संग्रहकर्ताओं ने मांगी प्रदर्शनी की जगह, पुरानी हॉबी को फिर से जीवंत करने की कोशिश

19 सितंबर, 2026 :  मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कई पारंपरिक शौक धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी से दूर होते जा रहे हैं। स्टांप कलेक्शन यानी फिलाटेली भी ऐसी ही एक हॉबी है, जिसे कभी बच्चों से लेकर बड़े लोगों तक काफी पसंद किया जाता था। अब अमृतसर के स्टांप संग्रहकर्ता इस शौक को दोबारा लोगों, खासकर युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनी की जगह उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं।

अमृतसर में करीब 30 स्टांप कलेक्टर्स

रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर में करीब 30 स्टांप संग्रहकर्ता हैं, जिनके पास हजारों स्टांप का संग्रह है। इन संग्रहों की कुल कीमत कई करोड़ रुपये बताई गई है। कई संग्रहकर्ताओं ने दशकों से मेहनत करके अलग-अलग दौर और विषयों से जुड़े स्टांप सुरक्षित रखे हुए हैं।

इनमें से कई लोग अमृतसर फिलाटेली क्लब यानी APC से जुड़े रहे हैं। यह क्लब 1974-75 में स्थापित हुआ था और शुरुआती दौर में इसके करीब 80 से 100 सदस्य हुआ करते थे। समय के साथ सदस्यों की संख्या और इस हॉबी में लोगों की रुचि दोनों में कमी आई है।

अलमारियों तक सीमित रह गई कलेक्शन

स्टांप संग्रहकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी वर्षों की मेहनत से तैयार की गई कलेक्शन लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। पर्याप्त प्रदर्शनी स्थल नहीं होने के कारण हजारों स्टांप घरों की अलमारियों में रखे रहते हैं।

संग्रहकर्ताओं का कहना है कि अगर इन स्टांप को नियमित रूप से प्रदर्शित करने की सुविधा मिले तो आम लोग भी इस कला और इतिहास से जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही बच्चों और युवाओं को भी इस पारंपरिक हॉबी के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

पहले GPO में होती थी प्रदर्शनी

अमृतसर फिलाटेली क्लब के अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर के अनुसार, क्लब को पहले जनरल पोस्ट ऑफिस यानी GPO में प्रदर्शनी के लिए जगह मिलती थी। वहां फिलाटेली से जुड़ी गतिविधियां और प्रदर्शनियां आयोजित की जाती थीं।

बाद में GPO में हुए नवीनीकरण के दौरान क्लब ने अपना स्थान खो दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान क्लब के कुछ स्टांप भी खो गए। इसके बाद से संग्रहकर्ताओं के सामने अपनी कलेक्शन को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के लिए उपयुक्त स्थान की समस्या बनी हुई है।

सरकारी कार्यक्रमों में अस्थायी जगह की मांग

प्रदीप ठाकुर ने सरकारी और जिला प्रशासन की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में स्टांप संग्रहकर्ताओं के लिए अस्थायी प्रदर्शनी स्थल उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि ऐसे आयोजनों में स्टांप की प्रदर्शनी लगाकर ज्यादा लोगों तक इस हॉबी को पहुंचाया जा सकता है।

इसके अलावा उन्होंने अमृतसर में स्थायी प्रदर्शनी के लिए कुछ प्रमुख स्थानों का भी सुझाव दिया है। इनमें पार्टिशन म्यूजियम, अटारी-वाघा बॉर्डर, जलियांवाला बाग और महाराजा रणजीत सिंह पैनोरमा शामिल हैं।

दशकों से स्टांप जमा कर रहे हैं संग्रहकर्ता

प्रदीप ठाकुर ने बताया कि उन्होंने स्कूल के समय से ही स्टांप इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। उनके शुरुआती दौर में इस्तेमाल किए हुए और फेंके गए स्टांप भी संग्रह का हिस्सा बनते थे। समय के साथ फिलाटेली का स्वरूप बदला और सरकारी स्तर पर जारी होने वाले महंगे स्मारक स्टांप भी संग्रहकर्ताओं के बीच महत्वपूर्ण हो गए।

इस तरह स्टांप कलेक्शन केवल कागज के छोटे टुकड़ों को जमा करना नहीं रह गया, बल्कि इसमें इतिहास, संस्कृति, व्यक्तित्वों और अलग-अलग समय की घटनाओं को संरक्षित करने का पहलू भी जुड़ गया है।

विनोद सेठ ने चंडीगढ़ में दिखाई कलेक्शन

74 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंकर और फिलाटेलिस्ट विनोद सेठ अपनी कलेक्शन को प्रदर्शित करने के लिए कुछ अवसर हासिल करने में सफल रहे हैं। उन्होंने पिछले पांच वर्षों से चंडीगढ़ के मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी स्टांप कलेक्शन प्रदर्शित की है।

उनका कहना है कि अमृतसर में भी इसी तरह के अस्थायी और स्थायी प्रदर्शनी स्थलों की जरूरत है, ताकि स्थानीय संग्रहकर्ताओं को अपनी कलेक्शन लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल सके।

कलेक्शन को संभालना भी महंगा

स्टांप संग्रह करने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित रखना भी संग्रहकर्ताओं के लिए एक चुनौती है। अमृतसर के संग्रहकर्ता नीरज जैन के पास 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के स्टांप हैं। उन्होंने बताया कि स्टांप को सुरक्षित रखने के लिए अलमारियों, एल्बम और अन्य जरूरी सामग्री पर भी काफी खर्च करना पड़ता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के रखरखाव पर हर साल कलेक्शन की कीमत का कम से कम करीब 10 प्रतिशत तक खर्च हो सकता है। ऐसे में वर्षों की मेहनत से तैयार संग्रह को सुरक्षित रखना अपने आप में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

युवाओं को जोड़ना बड़ी चुनौती

स्टांप संग्रहकर्ताओं के लिए केवल अपनी कलेक्शन प्रदर्शित करना ही उद्देश्य नहीं है। वे चाहते हैं कि युवा पीढ़ी भी इस हॉबी से जुड़े। पिछले वर्षों में भी अमृतसर में फिलाटेली को युवाओं तक पहुंचाने के प्रयास हुए हैं। 2019 में अमृतसर GPO की ओर से स्कूलों में फिलाटेली क्लब शुरू करने की पहल की गई थी, ताकि छात्रों को स्टांप संग्रह के बारे में जानकारी दी जा सके।

2018 में भी अमृतसर के फिलाटेलिस्टों ने युवाओं के बीच स्टांप कलेक्शन को बढ़ावा देने और नियमित प्रदर्शनियों की जरूरत पर जोर दिया था।

स्टांप में छिपा है इतिहास

स्टांप किसी देश या शहर के इतिहास और संस्कृति को समझने का एक माध्यम भी होते हैं। अमृतसर से जुड़े फिलाटेलिस्टों ने हाल ही में शहर से संबंधित डाक टिकटों को भी एक साथ संकलित किया है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर, उसके धार्मिक स्थलों और प्रमुख व्यक्तित्वों से जुड़े कम से कम 30 डाक टिकट और तीन सिक्के जारी हो चुके हैं।

ऐसे में स्थानीय संग्रहकर्ताओं की कलेक्शन केवल निजी संपत्ति नहीं बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को देखने का एक अलग माध्यम भी बन सकती है।

प्रदर्शनी स्थल मिलने से बढ़ सकता है जुड़ाव

अमृतसर के फिलाटेलिस्ट चाहते हैं कि प्रशासन और संबंधित संस्थाएं उन्हें अपनी कलेक्शन प्रदर्शित करने के लिए जगह उपलब्ध कराने पर विचार करें। अस्थायी प्रदर्शनियों से शुरुआत करके इस गतिविधि को स्कूलों, सरकारी कार्यक्रमों और शहर के प्रमुख पर्यटन एवं विरासत स्थलों तक ले जाया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *