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पंजाब की लोक कला को मिलेगा नया मंच, Punjabi University में Folk Art और Tourism Centre शुरू

18 सितंबर, 2026 : पंजाब की समृद्ध लोक कला और पारंपरिक हस्तशिल्प को संरक्षित करने और नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में Punjabi University ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। विश्वविद्यालय परिसर में Rural Tourism and Traditional Arts Training Centre की शुरुआत की गई है। विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीप सिंह ने गुरुवार को इस केंद्र का उद्घाटन किया।

इस केंद्र का उद्देश्य पंजाब की पारंपरिक लोक कला, हस्तशिल्प और ग्रामीण पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को पंजाब की पारंपरिक कला और शिल्प से जुड़ी तकनीकों को सीखने और उनका अभ्यास करने का अवसर मिलेगा।

पंजाब की पारंपरिक कला को मिलेगा बढ़ावा

Punjab अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां की फुलकारी, पारंपरिक कढ़ाई और कई तरह के हस्तशिल्प ग्रामीण जीवन और लोक संस्कृति से जुड़े हुए हैं। आधुनिक समय में इन पारंपरिक कलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण चुनौती भी है।

Punjabi University में शुरू किया गया नया प्रशिक्षण केंद्र इसी दिशा में काम करेगा। यहां विद्यार्थियों को पारंपरिक कला के अलग-अलग रूपों से परिचित कराया जाएगा और उन्हें इन्हें व्यावहारिक तौर पर सीखने का अवसर मिलेगा।

फुलकारी और पारंपरिक कढ़ाई की मिलेगी ट्रेनिंग

नए केंद्र में विद्यार्थियों को फुलकारी और पारंपरिक कढ़ाई जैसी कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। फुलकारी पंजाब की प्रमुख पारंपरिक कढ़ाई कलाओं में शामिल है, जिसमें रंग-बिरंगे धागों के माध्यम से कपड़ों पर विभिन्न डिजाइन तैयार किए जाते हैं।

पारंपरिक कढ़ाई को प्रशिक्षण के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने से विद्यार्थियों को पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

पाखी बनाने की कला भी सिखाई जाएगी

केंद्र में पाखी यानी हाथ से बनाए जाने वाले पारंपरिक पंखे तैयार करने की कला भी सिखाई जाएगी। इसके अलावा पारंपरिक सिलाई और पंजाब से जुड़े अन्य हस्तशिल्प भी प्रशिक्षण का हिस्सा होंगे।

इस तरह केंद्र केवल पारंपरिक कलाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को इन कला रूपों का अभ्यास करने का अवसर भी देगा।

ग्रामीण पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा

केंद्र के नाम में Rural Tourism यानी ग्रामीण पर्यटन को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कला और ग्रामीण पर्यटन के बीच संबंध को मजबूत करना है।

पंजाब के गांवों में पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कला और संस्कृति की समृद्ध विरासत मौजूद है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों की कला और सांस्कृतिक पहचान को पर्यटन से जोड़ने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का मौका

विश्वविद्यालय के कुलपति जगदीप सिंह ने कहा कि पंजाब की लोक कला और पारंपरिक शिल्प को जीवित रखने के लिए इस तरह की पहल जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दोबारा जुड़ने में मदद करेगा।

विद्यार्थियों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि उन्हें किताबों और कक्षाओं से आगे जाकर पारंपरिक कलाओं को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा।

पारंपरिक कारीगरी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

पारंपरिक हस्तशिल्प को लंबे समय तक जीवित रखने के लिए जरूरी है कि नई पीढ़ी इसके बारे में जाने और इसे सीखने में रुचि ले। अगर युवा इन कला रूपों को सीखते हैं तो पंजाब की लोक कला को भविष्य में भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

फुलकारी, कढ़ाई, पाखी निर्माण और पारंपरिक सिलाई जैसी कलाएं केवल हस्तशिल्प नहीं हैं, बल्कि पंजाब की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी हैं।

कला और पर्यटन के बीच बनेगा संबंध

Rural Tourism and Traditional Arts Training Centre के जरिए पारंपरिक कला को ग्रामीण पर्यटन से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे पंजाब के लोक शिल्प और ग्रामीण संस्कृति को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की संभावनाएं बन सकती हैं।

विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह की गतिविधियों से विद्यार्थियों को कला, संस्कृति और पर्यटन के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।

पंजाब की विरासत को संरक्षित करने की पहल

Punjabi University में इस केंद्र की शुरुआत पंजाब की पारंपरिक कला को संरक्षित और बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम है। इसका फोकस विद्यार्थियों को पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जोड़ने के साथ-साथ पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर है।

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