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अमृतसर के दो गांवों में NDRF का मॉक ड्रिल, ग्रामीणों को आपदा से निपटने की दी ट्रेनिंग

17 सितंबर, 2026 : पंजाब के अमृतसर जिले के दो गांवों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की ओर से आपदा प्रबंधन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल आयोजित किया गया। 7वीं बटालियन NDRF, बठिंडा की टीम ने लोपोके ब्लॉक के मंडियांवाला और भागूपुर उत्तर गांवों में ग्रामीणों को आपात स्थिति से निपटने, प्राथमिक उपचार और बचाव के बुनियादी तरीकों की जानकारी दी।

ग्रामीणों को आपदा प्रबंधन की जानकारी

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को किसी भी प्राकृतिक या अन्य आपदा के दौरान सुरक्षित रहने और जरूरत पड़ने पर शुरुआती स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य करने के लिए तैयार करना था। NDRF की टीम ने ग्रामीणों को अलग-अलग आपात परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।

कार्यक्रम का नेतृत्व टीम कमांडर सब-इंस्पेक्टर रेख सिंह मीणा ने किया। टीम ने प्रशिक्षण के दौरान ग्रामीणों को कई बचाव तकनीकों का प्रदर्शन करके समझाया।

प्राथमिक उपचार और CPR की ट्रेनिंग

NDRF कर्मियों ने ग्रामीणों को घाव पर ड्रेसिंग और पट्टी करने, खून बहने की स्थिति में उसे नियंत्रित करने और घायल व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से संभालने की जानकारी दी।

इसके अलावा वयस्कों और बच्चों के लिए CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन की प्रक्रिया का भी प्रदर्शन किया गया। सांस की नली में किसी बाहरी वस्तु के फंसने की स्थिति में सहायता करने और घायल व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से उठाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के तरीकों के बारे में भी बताया गया।

स्थानीय सामान से स्ट्रेचर बनाने का तरीका

प्रशिक्षण के दौरान NDRF टीम ने यह भी दिखाया कि आपात स्थिति में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों की मदद से अस्थायी स्ट्रेचर कैसे तैयार किया जा सकता है। इसके लिए कंबल, टी-शर्ट और बोरियों जैसी सामान्य वस्तुओं का इस्तेमाल करने का तरीका बताया गया।

इस तरह की जानकारी आपदा के समय तब उपयोगी हो सकती है, जब तुरंत एंबुलेंस या अन्य चिकित्सा सहायता उपलब्ध न हो।

बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी

अमृतसर के इन गांवों में ग्रामीणों को बाढ़ जैसी स्थिति के दौरान इस्तेमाल किए जा सकने वाले अस्थायी तैरने वाले उपकरण तैयार करने की जानकारी भी दी गई। NDRF टीम ने खाली बोतलों, बर्तनों और तेल या दही के खाली कंटेनरों जैसी घरेलू वस्तुओं की मदद से ऐसे उपकरण तैयार करने का तरीका समझाया।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीणों को आपदा के शुरुआती समय में अपनी और आसपास के लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने में सक्षम बनाना था।

आग से बचाव के उपाय भी बताए

कार्यक्रम में आग लगने की स्थिति में सुरक्षा उपायों की जानकारी भी दी गई। NDRF टीम ने अग्निशामक यंत्र के इस्तेमाल का प्रदर्शन किया और PASS तकनीक के बारे में बताया।

PASS के तहत पिन निकालना, आग के आधार की ओर नोजल करना, लीवर दबाना और आग की दिशा में नोजल को एक तरफ से दूसरी तरफ घुमाना शामिल है। ग्रामीणों को आग जैसी आपात स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित तरीके से कार्रवाई करने के बारे में भी समझाया गया।

भूकंप के दौरान ‘Drop, Cover and Hold’ की जानकारी

मॉक ड्रिल के दौरान भूकंप जैसी स्थिति से निपटने के लिए Drop, Cover and Hold (DCH) तकनीक का प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों को सुरक्षित निकासी मार्ग, निर्धारित एकत्रीकरण स्थान और आपात स्थिति में जरूरतमंद लोगों की मदद करने के तरीकों के बारे में भी बताया गया।

इसके अलावा आंधी-तूफान, बिजली गिरने, हीटवेव, शीतलहर, बिजली के झटके और सांप के काटने जैसी परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जागरूक किया गया।

आपदा से जुड़ी मोबाइल ऐप की जानकारी

NDRF टीम ने ग्रामीणों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से जुड़े Sachet, Meghdoot, Damini और Bhookamp ऐप के बारे में भी जानकारी दी। इन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल मौसम और आपदा से संबंधित चेतावनियों तथा जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है।

ग्रामीणों को रासायनिक आपात स्थितियों से संबंधित जानकारी देने वाले Emergency Response Guide (ERG) के बारे में भी बताया गया।

आपदा के समय ग्रामीणों की भूमिका महत्वपूर्ण

NDRF के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मंडियांवाला और भागूपुर उत्तर गांवों में आपदा से निपटने की तैयारी को मजबूत करना था। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को प्राथमिक बचाव और सुरक्षा तकनीकों की जानकारी होने से आपात स्थिति में शुरुआती प्रतिक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है।

मॉक ड्रिल और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से ग्रामीणों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि आपदा के समय किस तरह खुद को सुरक्षित रखते हुए दूसरे लोगों की भी मदद की जा सकती है।

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