15 सितंबर, 2026 भारत में हर दिन करीब 150 बच्चे क्लबफुट जैसी जन्मजात विकृति के साथ पैदा होते हैं। ऐसे बच्चों की समय पर पहचान और उचित उपचार बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती चरण में इलाज शुरू होने पर इस समस्या को काफी हद तक ठीक किया जा सकता है। यह जानकारी PGIMS रोहतक में आयोजित क्लबफुट मैनेजमेंट की 174वीं रिफ्रेशर ट्रेनिंग के दौरान विशेषज्ञों ने दी।
क्लबफुट को लेकर विशेषज्ञों ने किया जागरूक
क्लबफुट एक ऐसी जन्मजात स्थिति है, जिसमें बच्चे का पैर अंदर और नीचे की ओर मुड़ा हुआ होता है। यदि जन्म के बाद समय पर इसका इलाज शुरू नहीं किया जाए तो आगे चलकर बच्चे को चलने-फिरने में परेशानी और स्थायी विकलांगता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
क्योर इंडिया के मेडिकल डायरेक्टर और ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मैथ्यू वर्गीज ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि भारत में रोजाना लगभग 150 बच्चे क्लबफुट के साथ जन्म लेते हैं। उन्होंने इस समस्या की समय पर पहचान और उपचार की जरूरत पर जोर दिया।
174वीं रिफ्रेशर ट्रेनिंग का आयोजन
PGIMS रोहतक में आयोजित 174वीं रिफ्रेशर ट्रेनिंग में क्लबफुट के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली Ponseti Method पर चर्चा की गई। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों को क्लबफुट की पहचान, उपचार और मरीजों की देखभाल के बारे में व्यावहारिक जानकारी देना था।
Pt. BD Sharma University of Health Sciences के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य मानवता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि समय पर और सही उपचार से कई जन्मजात विकृतियों को ठीक किया जा सकता है और बच्चों को स्वस्थ तथा आत्मविश्वास से भरा जीवन दिया जा सकता है।
2009 से क्लबफुट के इलाज के लिए काम कर रहा Cure India
डॉ. मैथ्यू वर्गीज ने बताया कि Cure India ने अप्रैल 2009 में क्लबफुट से होने वाली स्थायी विकलांगता को रोकने के उद्देश्य से अपना अभियान शुरू किया था। संगठन की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में बच्चों को मुफ्त उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश के 29 राज्यों के 262 जिलों में 441 साप्ताहिक क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं, जहां क्लबफुट से प्रभावित बच्चों को उपचार दिया जाता है।
हरियाणा में 6 विशेष क्लबफुट केंद्र
PGIMS के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख और विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. रूप सिंह ने बताया कि PGIMS और Cure India International Trust के बीच पिछले कई वर्षों से साझेदारी के तहत काम किया जा रहा है। इस पहल के तहत हरियाणा में 528 से अधिक बच्चों का उपचार किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार के सहयोग से राज्य में छह विशेष क्लबफुट केंद्र संचालित हो रहे हैं, जहां बच्चों का Ponseti Method के जरिए मुफ्त उपचार किया जाता है।
शुरुआती हफ्तों में इलाज शुरू करना सबसे बेहतर
विशेषज्ञों के अनुसार क्लबफुट का उपचार बच्चे के जन्म के कुछ सप्ताह के भीतर शुरू करना सबसे प्रभावी रहता है। Ponseti Method के तहत विशेष प्लास्टर की मदद से बच्चे के पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाया जाता है।
कई बच्चों में उपचार के दौरान दो से तीन महीने की उम्र में एड़ी से जुड़ी एक छोटी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है। इसके बाद पैर को दोबारा मुड़ने से रोकने के लिए विशेष जूते या ब्रेस का इस्तेमाल किया जाता है। समय पर उपचार मिलने पर अधिकांश बच्चों को बड़ी सर्जरी से बचाया जा सकता है।
गरीब परिवारों के बच्चों को मुफ्त इलाज पर जोर
कार्यक्रम के दौरान PGIMS प्रशासन ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक मुफ्त और बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने पर जोर दिया। कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल जटिल सर्जरी करना नहीं, बल्कि ऐसे प्रशिक्षित और संवेदनशील डॉक्टर तैयार करना भी है जो समाज के जरूरतमंद वर्गों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचा सकें।
उन्होंने कहा कि क्लबफुट जैसी जन्मजात विकृति का समय पर उपचार बच्चे के पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है और उसे सामान्य तथा आत्मविश्वास से भरा जीवन जीने में मदद कर सकता है।
जागरूकता और शुरुआती जांच जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि क्लबफुट के मामलों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। परिवारों को बच्चे के पैर की स्थिति में असामान्यता दिखाई देने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। शुरुआती उम्र में उपचार शुरू होने से परिणाम बेहतर रहते हैं और बच्चे के सामान्य विकास की संभावना बढ़ती है।
PGIMS में आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य चिकित्सा पेशेवरों को क्लबफुट के आधुनिक उपचार के बारे में प्रशिक्षित करना और ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक समय पर उपचार पहुंचाने की दिशा में प्रयासों को मजबूत करना भी रहा।
