14 सितंबर, 2026 : दिल्ली में e-rickshaw के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक FIR के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में कथित तौर पर ₹8,000 से ₹10,000 में e-rickshaw का स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध कराया जा रहा था, जबकि आवेदक ने जरूरी ट्रेनिंग तक नहीं ली थी।
बिना ट्रेनिंग लाइसेंस दिलाने का आरोप
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली सरकार की ओर से e-rickshaw चालकों के लिए निर्धारित ट्रेनिंग जरूरी है। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ लोगों को ट्रेनिंग में शामिल हुए बिना ही स्थायी लाइसेंस उपलब्ध कराया जा रहा था।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली की सड़कों पर e-rickshaw की संख्या लगातार बढ़ने से यातायात और नियमन को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
₹8 हजार से ₹10 हजार तक की रकम
FIR में सामने आए आरोपों के मुताबिक, e-rickshaw का स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए कथित तौर पर ₹8,000 से ₹10,000 तक की रकम ली जाती थी।
इस प्रक्रिया में वाहन निर्माता, डीलर और कथित दलालों के बीच नेटवर्क होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दिल्ली की EV Policy 2.0 भी चर्चा में
यह मामला दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन नीति से जुड़े नियमों के बीच सामने आया है। दिल्ली सरकार की EV Policy 2.0 के तहत एक ड्राइवर के नाम पर कई e-rickshaw के पंजीकरण को रोकने के लिए व्यवस्था की गई है। अब एक ड्राइवर के नाम पर केवल एक e-rickshaw पंजीकृत किया जा सकता है।
ऐसे में लाइसेंस और वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता नीति के उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है।
जांच से सामने आएगा पूरा नेटवर्क
FIR में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान यह पता लगाया जाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर लाइसेंस किस तरीके से जारी किए गए और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच एजेंसियों के सामने यह भी चुनौती होगी कि क्या सिर्फ कुछ बिचौलियों तक मामला सीमित है या फिर लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भी इसमें भूमिका रही है।
e-rickshaw चालकों की सुरक्षा भी अहम
e-rickshaw सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में चालकों के पास वैध लाइसेंस और जरूरी प्रशिक्षण होना सड़क सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर कोई व्यक्ति बिना निर्धारित प्रशिक्षण के लाइसेंस हासिल करता है तो इससे न केवल नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि सड़क पर यात्रियों और दूसरे वाहन चालकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार की व्यवस्था पर उठे सवाल
लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता सामने आने के बाद निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस तरह की कथित गड़बड़ी को रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।
