14 सितंबर, 2026 : हरियाणा के हिसार स्थित महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट को इंटीग्रेटेड एविएशन और कार्गो हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर करीब नौ महीने बाद भी अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है। हरियाणा सरकार और अमेरिका की यूएस ट्रेड एंड डेवलपमेंट एजेंसी (USTDA) के बीच दिसंबर 2025 में समझौता हुआ था, लेकिन अब तक परियोजना के लिए तकनीकी अध्ययन शुरू नहीं हो पाया है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध परियोजना स्थिति में कंसल्टेंट के चयन की प्रक्रिया अभी भी “selection in progress” दिखाई जा रही है।
दिसंबर 2025 में हुआ था समझौता
हिसार एयरपोर्ट के विकास को लेकर हरियाणा एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HADC) और USTDA के बीच दिसंबर 2025 में समझौता हुआ था। यह समझौता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की मौजूदगी में नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में हुआ था।
इस समझौते का उद्देश्य हिसार एयरपोर्ट को केवल यात्री उड़ानों तक सीमित रखने के बजाय एक बड़े एविएशन और कार्गो हब के रूप में विकसित करना था। समझौते के तहत परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जानी थी।
करीब 2,988 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना
USTDA ने इस परियोजना के लिए करीब 12.5 लाख डॉलर यानी लगभग ₹10.53 करोड़ की तकनीकी सहायता को मंजूरी दी थी। प्रस्तावित परियोजना हिसार एयरपोर्ट के लगभग 2,988 एकड़ क्षेत्र को कवर करती है।
समझौते के अनुसार परियोजना को दो वर्षों के भीतर पूरा करने की परिकल्पना की गई थी। हालांकि, नौ महीने गुजर जाने के बाद भी परियोजना के तकनीकी अध्ययन की शुरुआत नहीं हो सकी है।
इंटीग्रेटेड एविएशन हब में क्या-क्या शामिल है?
हिसार को एक बड़े इंटीग्रेटेड एविएशन हब के रूप में विकसित करने की योजना में कई महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। इसमें एयरपोर्ट संचालन के साथ-साथ एक इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, WorldPort कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब, मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO सुविधा और एंटरटेनमेंट विलेज जैसी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
इसका उद्देश्य एयरपोर्ट के आसपास विमानन, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक गतिविधियों और कार्गो से जुड़े निवेश को बढ़ावा देना है।
कंसल्टेंट चयन प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं
परियोजना में सबसे बड़ी देरी कंसल्टेंट के चयन को लेकर सामने आ रही है। USTDA की वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार कंसल्टेंट चयन की स्थिति अभी भी “selection in progress” है।
अभी तक किसी अमेरिकी फर्म की नियुक्ति या तकनीकी सहायता से संबंधित अध्ययन शुरू होने की जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। अधिकारियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह देरी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि USTDA की सहायता को हिसार को इंटीग्रेटेड एविएशन हब बनाने की बड़ी योजना का अहम हिस्सा माना गया था।
निवेश और PPP मॉडल पर भी काम होना था
USTDA की तकनीकी सहायता के तहत संभावित निवेशकों को आकर्षित करने, एयरपोर्ट परियोजना के अलग-अलग हिस्सों को एकीकृत करने और विभिन्न परियोजनाओं को विकास तथा क्रियान्वयन के लिए तैयार करने में मदद की जानी थी।
इसके अलावा सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल की संभावनाओं का आकलन और प्रस्तावित WorldPort कार्गो एवं लॉजिस्टिक्स हब की व्यवहार्यता की जांच भी इस सहायता का हिस्सा थी।
हरियाणा सरकार ने ₹315 करोड़ का बजट रखा
हिसार के एविएशन हब को विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने अलग से भी बजट का प्रावधान किया है। सरकार ने स्वर्ण जयंती इंटीग्रेटेड एविएशन हब के लिए ₹315 करोड़ की बजटीय राशि आवंटित की है।
हालांकि, भौतिक बुनियादी ढांचे और इससे जुड़े अन्य कार्य अलग स्तर पर आगे बढ़ाए जा रहे हैं, जबकि USTDA के साथ हुआ समझौता मुख्य रूप से तकनीकी सहायता और व्यापक विकास योजना से जुड़ा है।
हिसार के लिए क्यों अहम है परियोजना?
हिसार एयरपोर्ट को इंटीग्रेटेड एविएशन और कार्गो हब के रूप में विकसित करने से क्षेत्र में विमानन गतिविधियों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कार्गो हब के विकास से माल परिवहन और सप्लाई चेन से जुड़ी गतिविधियों को भी मजबूती मिल सकती है।
इसके साथ ही MRO जैसी सुविधाओं के विकास से विमानन क्षेत्र से जुड़े नए कारोबारी और रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण कदम कंसल्टेंट का चयन और तकनीकी अध्ययन की शुरुआत है। इसके बाद ही परियोजना के विभिन्न घटकों की व्यवहार्यता, निवेश मॉडल और क्रियान्वयन की दिशा स्पष्ट हो सकेगी।
