9 सितंबर 2026: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि शिक्षा केवल साक्षर बनाने या डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति में आत्मविश्वास पैदा करने, चरित्र का निर्माण करने, कर्तव्य की भावना विकसित करने और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने वाली शक्ति है। मुख्यमंत्री मंगलवार को कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा में स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की 22वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित कर रहे थे।
लाडवा में आयोजित हुआ श्रद्धांजलि समारोह
यह कार्यक्रम DBS International Public School, लाडवा में आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस अवसर पर स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक नए ऑडिटोरियम हॉल का उद्घाटन भी किया।
मुख्यमंत्री ने स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी के जीवन, तपस्या, आध्यात्मिक अनुशासन और समाज सेवा को याद करते हुए कहा कि कुछ महान व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनका जीवन उनके निधन के बाद भी समाज को दिशा देता रहता है।
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं
CM सैनी ने कहा कि शिक्षा को केवल पढ़ाई, साक्षरता या डिग्री तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। वास्तविक शिक्षा व्यक्ति को आत्मविश्वासी बनाने के साथ-साथ उसके चरित्र को मजबूत करती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति में सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित होती है। इसके साथ ही समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी पैदा होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बच्चों के हाथ में आधुनिक तकनीक है, लेकिन उन्हें अपनी संस्कृति और मूल्यों से भी जुड़े रहना चाहिए। उनके अनुसार आधुनिक ज्ञान और भारतीय मूल्यों का संतुलन युवाओं के व्यक्तित्व को मजबूत बना सकता है।
स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया और उनके ज्ञान को समाज के कल्याण से जोड़ा।
उन्होंने वेदों के ज्ञान को स्कूलों तक पहुंचाने और भगवद्गीता के कर्मयोग के संदेश को जनसेवा से जोड़ने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, स्वामी जी ने भारतीय संस्कृति और मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परंपरागत शिक्षा और आधुनिक शिक्षा का मेल
CM सैनी ने कहा कि स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी गुरुकुल शिक्षा पद्धति के समर्थक थे और उनका प्रयास पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना था।
उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके मार्गदर्शन में संस्कृत कॉलेज, वैदिक विद्यालय, लड़कियों के कॉलेज और स्कूल सहित कई संस्थान स्थापित किए गए। कुरुक्षेत्र स्थित श्री जयराम विद्यापीठ की स्थापना भी उनके प्रयासों से हुई थी।
बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्वामी जी के महिला शिक्षा से जुड़े योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि ऐसे समय में जब लड़कियों की शिक्षा को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता था, स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी ने बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी।
उन्होंने लोहार माजरा स्थित सेठ नवरंग राय लोहिया जयराम गर्ल्स कॉलेज का भी उल्लेख किया, जो लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थान के रूप में विकसित हुआ।
बच्चों को आधुनिक तकनीक के साथ संस्कारों से जोड़ने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के बच्चे विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, प्रशासन और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। उनके हाथ में आधुनिक तकनीक है और वे वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और भारतीय मूल्यों का मेल स्वामी देवेंद्र स्वरूप ब्रह्मचारी के विचारों को आगे बढ़ाने का एक तरीका है। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत से भी जोड़ना जरूरी है।
शिक्षा से समाज और राष्ट्र निर्माण
CM सैनी ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझना और दूसरों के कल्याण में योगदान देना भी है।
उन्होंने कहा कि जब शिक्षा व्यक्ति में आत्मविश्वास, चरित्र, अनुशासन और सेवा की भावना पैदा करती है, तो उसका लाभ पूरे समाज को मिलता है।
कार्यक्रम में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व मंत्री जेपी दलाल, पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। इस दौरान संतों और धार्मिक नेताओं को भी सम्मानित किया गया। स्वामी हरि चेतनानंद और प्रोफेसर रमेश कुमार पांडे को पुरस्कार प्रदान किए गए।
