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दिल्ली में PG accommodations के लिए नई नीति का ड्राफ्ट तैयार होगा, पुराने भवनों का होगा Structural Audit

8 सितंबर 2026: दिल्ली सरकार ने शहर में Paying Guest (PG) accommodations की सुरक्षा और नियमन को लेकर नई नीति तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला दक्षिण दिल्ली के सत्या निकेतन में PG भवन के ढहने की घटना के बाद लिया गया है। हादसे के बाद सरकार ने पुराने भवनों की सुरक्षा जांच और PG accommodations के लिए स्पष्ट नियम बनाने पर जोर दिया है।

पुराने भवनों का होगा Structural Audit

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सार्वजनिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पुराने भवनों का Structural Audit कराया जाएगा। ऐसे भवनों को इस्तेमाल में लेने से पहले उनकी सुरक्षा का प्रमाणन भी जरूरी होगा।

सरकार की प्रस्तावित नीति के तहत PG, नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों वाले भवनों के मालिकों को Structural Audit Report जमा करनी पड़ सकती है। भवन की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही वहां ऐसी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी जाएगी।

PG accommodations की भी होगी जांच

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल उस भवन तक सीमित नहीं रहेगी जहां हादसा हुआ। आसपास के इलाकों में मौजूद संवेदनशील भवनों और PG accommodations की भी जांच की जाएगी।

अधिकारियों को ऐसे भवनों की पहचान करने और उनकी सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है।

अवैध निर्माण पर भी सख्ती

नई नीति के साथ दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सांसदों, विधायकों और पार्षदों से अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध निर्माण की पहचान कर संबंधित विभागों को जानकारी देने को कहा है।

सरकार के अनुसार, अवैध निर्माण की निगरानी के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय उसे शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।

PG सेक्टर में लंबे समय से नियमन की कमी

दिल्ली में PG accommodations को लेकर नियमन का मुद्दा नया नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 1993 से ही PG accommodation को लेकर नियम बनाने और व्यवस्था तैयार करने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन अब तक एक व्यापक dedicated PG policy लागू नहीं हो सकी।

2023 में मुकेरजी नगर में एक महिला PG में आग लगने के बाद भी PG establishments का सर्वे कराया गया था। उस समय अधिकारियों ने बताया था कि residential areas में PG चलाने के लिए अलग से स्पष्ट लाइसेंसिंग व्यवस्था नहीं थी, हालांकि building, land-use और fire-safety से जुड़े नियम लागू होते थे।

PG मालिकों और छात्रों दोनों पर पड़ेगा असर

नई व्यवस्था लागू होने पर PG संचालकों को भवन की सुरक्षा, नियमों के पालन और जरूरी प्रमाणपत्रों पर अधिक ध्यान देना होगा। दूसरी ओर, छात्रों को भी सुरक्षित और नियमों के तहत संचालित accommodation मिलने की उम्मीद है।

एक प्रस्तावित नियामक ढांचे में PG registration, inspections और छात्रों की शिकायतों के समाधान जैसी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि इन प्रावधानों का अंतिम स्वरूप सरकार द्वारा नीति और कानून को अंतिम रूप देने के बाद ही स्पष्ट होगा।

छात्रों की सुरक्षा पर सरकार का जोर

दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र कॉलेज और विश्वविद्यालयों के आसपास PG तथा private hostels में रहते हैं। ऐसे में भवनों की Structural Safety को लेकर सरकार का नया कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुराने या असुरक्षित भवनों में बड़ी संख्या में लोगों को रहने या अन्य सार्वजनिक गतिविधियां संचालित करने की अनुमति न मिले। नियमित Structural Audit और Safety Certification से भवनों की स्थिति की समय-समय पर समीक्षा की जा सकेगी।

सत्या निकेतन हादसे के बाद बढ़ी चिंता

सत्या निकेतन में PG भवन गिरने की घटना के बाद दिल्ली में छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इस हादसे ने पुराने भवनों, अवैध निर्माण और मौजूदा निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी ध्यान खींचा है।

इसी पृष्ठभूमि में दिल्ली सरकार अब PG accommodations के लिए अधिक स्पष्ट और सख्त नियामक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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