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लंगर के बाद सफाई की अनोखी सेवा: अमृतसर में पूर्व बैंक मैनेजर ने थर्मोकोल प्लेटों के खिलाफ छेड़ी मुहिम

8 सितंबर 2026: सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर अमृतसर के पूर्व बैंक मैनेजर अवतार सिंह घुल्ला पिछले एक दशक से अधिक समय से एक अनोखी मुहिम चला रहे हैं। वह लंगर समाप्त होने के बाद विभिन्न स्थानों पर पहुंचकर इस्तेमाल की गई डिस्पोजेबल और थर्मोकोल प्लेटों समेत अन्य कचरा इकट्ठा करते हैं और उसे उचित तरीके से निपटाने का प्रयास करते हैं।

खास तौर पर श्री दरबार साहिब के आसपास आयोजित होने वाले लंगरों के बाद घुल्ला अपनी सेवा के लिए पहुंचते हैं। उनका उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि लंगर आयोजकों को पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

2012 में शुरू हुई सेवा की पहल

अवतार सिंह घुल्ला पंजाब एंड सिंध बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में लंगर आयोजकों से संपर्क करना शुरू किया और उनसे डिस्पोजेबल प्लेटों के इस्तेमाल को कम करने तथा लंगर के बाद पैदा होने वाले कचरे के बेहतर प्रबंधन की अपील की।

जब उनकी अपील को शुरुआत में अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने खुद इस दिशा में काम करने का फैसला किया। वर्ष 2013 में, अपनी सेवानिवृत्ति से करीब एक साल पहले, उन्होंने मोटरसाइकिल के पीछे लगाने के लिए एक ट्रॉली की व्यवस्था की और लंगर स्थलों से कचरा इकट्ठा करने लगे।

थर्मोकोल की जगह पत्तलों को बढ़ावा

रिटायरमेंट के बाद घुल्ला ने अपनी मुहिम को और आगे बढ़ाया। उन्होंने लंगर आयोजकों को थर्मोकोल प्लेटों की जगह जैव-अवक्रमणीय पत्तलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया।

उनका मानना है कि लंगर जैसी सामुदायिक सेवा के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उनकी पहल से अमृतसर में कई लंगर आयोजकों ने थर्मोकोल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर पत्तलों को अपनाया है।

एक लंगर से 5 से 7 हजार पत्तलें इकट्ठी

घुल्ला के अनुसार, वह एक लंगर स्थल से करीब 5,000 से 7,000 पत्तलें इकट्ठी करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में उनके द्वारा लगभग 4 से 5 लाख पत्तलें पिंगलवाड़ा के ग्रीन मैन्योर प्रोजेक्ट की रीसाइक्लिंग सुविधा तक भेजी जा चुकी हैं।

वहां इन पत्तलों को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी और गोबर के साथ मिलाया जाता है। इसके बाद इनके जैविक रूप से गलने की प्रक्रिया होती है, जिससे मिट्टी में जैविक पदार्थ जोड़ने में मदद मिलती है।

हजारों पत्तलों को संभालने के लिए बनवाया खास उपकरण

बड़ी संख्या में पत्तलों को इकट्ठा करने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए घुल्ला ने एक विशेष उपकरण भी तैयार करवाया है। इसमें स्टील की नुकीली संरचना का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सैकड़ों पत्तलों को एक साथ दबाकर व्यवस्थित किया जा सकता है।

इस व्यवस्था से बड़ी मात्रा में पत्तलों की पैकिंग और परिवहन आसान हो जाता है।

स्टील की प्लेटों के विकल्प पर भी अलग राय

घुल्ला थर्मोकोल के विकल्प के तौर पर स्टील की प्लेटों को अपनाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि स्टील की प्लेटों को धोने में काफी मात्रा में पानी और रासायनिक डिटर्जेंट की जरूरत पड़ सकती है।

इसी वजह से वह जैव-अवक्रमणीय पत्तलों को अधिक उपयुक्त विकल्प मानते हैं और लंगर आयोजकों को इनका इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं।

15 स्वयंसेवक भी जुड़े

इस सेवा कार्य में अब एकजोत लंगर सेवा सोसाइटी के करीब 15 स्वयंसेवक भी घुल्ला का सहयोग करते हैं। टीम लंगर स्थलों पर जाकर इस्तेमाल किए गए सामान को इकट्ठा करने और उसे उचित स्थान तक पहुंचाने में मदद करती है।

घुल्ला का कहना है कि उनके पास खुद लंगर आयोजित करने की आर्थिक क्षमता नहीं है, लेकिन वह सफाई और पर्यावरण संरक्षण के जरिए अपनी सेवा दे सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं में भी सक्रिय

अवतार सिंह घुल्ला चीफ खालसा दीवान की पर्यावरण समिति से भी जुड़े हुए हैं। उनके सेवा कार्य को पंजाब सरकार, नगर निगम और धार्मिक संगठनों की ओर से सराहना मिल चुकी है।

फिरोजपुर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी उन्हें प्रशंसा-पत्र देकर सम्मानित किया था।

सेवा के साथ स्वच्छता का संदेश

घुल्ला की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक सेवा केवल भोजन बांटने तक सीमित नहीं है। लंगर के बाद साफ-सफाई करना, कचरे का उचित प्रबंधन करना और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना भी सेवा का हिस्सा हो सकता है।

अमृतसर जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थल पर बड़ी संख्या में आयोजित होने वाले लंगरों के बीच ऐसी पहल स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकती है।

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