07 सितंबर 2026: पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत डायबिटिक फुट और इससे जुड़ी जटिलताओं से जूझ रहे 560 मरीजों को इलाज उपलब्ध कराया गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब आठ महीनों में इन मरीजों के उपचार पर कुल ₹1.32 करोड़ खर्च किए गए। योजना के तहत ऐसे मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया, जिनके पैरों में संक्रमण और गंभीर घाव के कारण अंग को नुकसान पहुंचने का खतरा था।
छोटी चोट भी बन सकती है गंभीर समस्या
डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में पैरों पर होने वाली छोटी चोट या घाव कई बार गंभीर रूप ले सकता है। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण मरीज को चोट या दर्द का सही एहसास नहीं हो पाता। वहीं, शरीर में रक्त संचार खराब होने से घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
समय पर उपचार नहीं मिलने पर संक्रमण पैर के गहरे ऊतकों तक फैल सकता है और गंभीर मामलों में अंग को बचाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में शुरुआती जांच और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
560 मरीजों को मिला उपचार
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पिछले लगभग आठ महीनों में 560 मरीजों को डायबिटिक फुट और इससे जुड़ी जटिलताओं का इलाज मिला। इन उपचारों पर कुल ₹1.32 करोड़ खर्च किए गए।
इनमें 126 मरीजों का सर्जिकल मैनेजमेंट किया गया, जिस पर करीब ₹44.55 लाख खर्च हुए। वहीं, 123 मरीजों को मेडिकल मैनेजमेंट उपलब्ध कराया गया।
संक्रमण रोकने के लिए की गई सर्जरी
योजना के तहत इलाज पाने वाले मरीजों में 47 वर्षीय हरचरण सिंह भी शामिल हैं। वह एडवांस्ड डायबिटिक फुट की समस्या से जूझ रहे थे। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण चोट का पता लगाने की क्षमता कम हो गई थी और संक्रमण गहरे ऊतकों तक पहुंच गया था। डॉक्टरों ने संक्रमित और मृत ऊतकों को हटाने के लिए सर्जिकल डिब्राइडमेंट किया।
इसी तरह 38 वर्षीय राजा के पैर में डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण हुआ घाव गंभीर संक्रमण में बदल गया था। संक्रमण के हड्डी तक पहुंचने का खतरा था, इसलिए समय पर सर्जरी की गई।
वीना और संतोख सिंह को भी मिला उपचार
57 वर्षीय वीना के मामले में खराब रक्त संचार के कारण पैर का अल्सर ठीक नहीं हो रहा था। स्थिति बिगड़ने पर उनका पैर काटने तक का खतरा पैदा हो गया था। डॉक्टरों ने संक्रमित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी की।
वहीं, 67 वर्षीय संतोख सिंह लंबे समय से न भरने वाले डायबिटिक फुट अल्सर से परेशान थे। घाव में पस बनने के बाद संक्रमण को नियंत्रित करने और प्रभावित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जिकल हस्तक्षेप किया गया।
इलाज के दूसरे विकल्प भी उपलब्ध
560 मरीजों के उपचार में केवल सर्जरी ही शामिल नहीं थी। कई मरीजों को लंबे समय तक घाव की ड्रेसिंग और एंटीबायोटिक उपचार दिया गया। इसके अलावा पैर की उंगली और पैर की सर्जरी, घुटने के नीचे से संबंधित प्रक्रियाएं, स्किन ग्राफ्टिंग और CT तथा MRI जैसी जांचें भी उपचार का हिस्सा रहीं।
कुछ गंभीर मामलों में रक्त और प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन के साथ-साथ डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर सेप्सिस और एनीमिया जैसी संबद्ध स्वास्थ्य समस्याओं का भी उपचार किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने क्या कहा?
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के आंकड़ों के पीछे मरीजों और उनके परिवारों की वास्तविक जिंदगी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि डायबिटिक फुट की जटिलताएं धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं और उपचार में देरी होने पर चलने-फिरने की क्षमता तथा अंग दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के किसी परिवार को समय पर इलाज कराने और उपचार का खर्च वहन करने की चिंता के बीच चुनाव न करना पड़े।
योजना का उद्देश्य सिर्फ इलाज की संख्या नहीं
डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना की सफलता को केवल किए गए उपचार या खर्च की राशि से नहीं मापा जाना चाहिए। इसका वास्तविक उद्देश्य मरीज को स्वस्थ होकर घर लौटने में मदद करना, परिवार को आर्थिक परेशानी से बचाना और जहां संभव हो वहां मरीज के अंग को बचाने का अवसर उपलब्ध कराना है।
समय पर इलाज से बच सकता है अंग
डायबिटिक फुट के मामलों में समय पर चिकित्सकीय जांच और उपचार महत्वपूर्ण हो सकता है। पैर में घाव, संक्रमण या ऐसा अल्सर जो लंबे समय तक ठीक न हो रहा हो, उसे नजरअंदाज करना गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सामने आए ये मामले यह दिखाते हैं कि समय पर उपचार मिलने से गंभीर संक्रमण से निपटने और मरीज के अंग को बचाने का अवसर मिल सकता है।
