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रिटायर्ड सरकारी अधिकारी ने बच्चों की सेवा के लिए छोड़ी नौकरी, अंबाला में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी पीड़ितों को दे रहे सहारा

6 सितंबर 2026 आमतौर पर लोग रिटायरमेंट के बाद अपने लिए समय निकालना चाहते हैं, लेकिन अंबाला के Naresh Mittal ने समाजसेवा को अपना जीवन समर्पित करने का फैसला किया। 56 वर्षीय Mittal ने Income Tax Department से VRS लेकर Duchenne Muscular Dystrophy (DMD) से पीड़ित बच्चों की मदद का रास्ता चुना है। वह अब Saha गांव में Seva Trust के माध्यम से बच्चों को फिजियोथेरेपी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में जुटे हैं।

नौकरी छोड़कर बच्चों की सेवा का फैसला

Naresh Mittal Income Tax Department में वरिष्ठ Income Tax Inspector के पद पर काम कर चुके हैं। उन्होंने 1996 में विभाग में क्लर्क के रूप में अपनी सेवा शुरू की थी। नौकरी में करीब चार साल की सेवा अभी बाकी थी, लेकिन बच्चों की स्थिति देखकर उन्होंने VRS लेने का फैसला किया।

Mittal के मुताबिक, उनका सामाजिक कार्यों से करीब 35 वर्षों से जुड़ाव रहा है। उन्होंने अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर स्वास्थ्य, रक्तदान, आंखों के शिविर, महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंद लोगों की मदद जैसे कई कार्य किए हैं।

एक बच्चे से मिली प्रेरणा

Mittal ने बताया कि वर्ष 2021 में एक प्रोजेक्ट के दौरान उनकी मुलाकात ऐसे परिवार से हुई, जिसका 12 वर्षीय बच्चा Duchenne Muscular Dystrophy से पीड़ित था। बच्चे और उसके परिवार की परेशानियों को देखकर उन्होंने इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए काम करने का निर्णय लिया।

DMD एक दुर्लभ और गंभीर बीमारी है, जिसमें बच्चों की मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होती जाती है। ऐसे बच्चों और उनके परिवारों को लंबे समय तक देखभाल और पुनर्वास की जरूरत होती है। Mittal के अनुसार, बीमारी का इलाज और देखभाल काफी महंगी हो सकती है, जिससे कई परिवारों के सामने बड़ी चुनौतियां आती हैं।

Saha में बनाया गया Seva Dhaam Ashram

बच्चों की मदद के उद्देश्य से Seva Trust की ओर से Ambala के Saha गांव में Seva Dhaam Ashram स्थापित किया गया है। इसका उद्घाटन मई 2026 में हुआ था।

इस परियोजना का उद्देश्य दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को मुफ्त देखभाल, पुनर्वास और सहयोग उपलब्ध कराना है। फिलहाल हरियाणा के 13 बच्चे यहां फिजियोथेरेपी की सुविधा ले रहे हैं।

फिजियोथेरेपी के साथ कई सुविधाओं की तैयारी

आश्रम में बच्चों को आगे चलकर फिजियोथेरेपी के अलावा हाइड्रोथेरेपी, Kattu therapy, योग, ध्यान और आयुर्वेदिक उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

फिजियोथेरेपी की सुविधा शुरू हो चुकी है। बच्चों के लिए एक पार्क भी विकसित किया जा रहा है, जहां उन्हें योग और मेडिटेशन कराया जाएगा। हाइड्रोथेरेपी सुविधा अगले वर्ष मार्च से शुरू किए जाने की उम्मीद है, जबकि अन्य सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएंगी।

CSR के जरिए मिल रहा सहयोग

Seva Dhaam Ashram की इस पहल को कुछ सरकारी और निजी कंपनियों की ओर से Corporate Social Responsibility यानी CSR के तहत सहयोग भी मिल रहा है।

ट्रस्ट का उद्देश्य केवल बच्चों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर करना और परिवारों को भी आवश्यक सहयोग देना है।

विदेशों में भी सहयोग तलाश रहा ट्रस्ट

इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए Seva Trust की एक टीम नवंबर में UK जाने वाली है। वहां Duchenne Muscular Dystrophy के क्षेत्र में काम कर रहे कुछ NGOs से मुलाकात कर उन्हें अंबाला में चल रही पहल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

इससे बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और विशेषज्ञ सहयोग को और मजबूत करने की उम्मीद है।

मुश्किल दौर के बावजूद समाजसेवा जारी

Naresh Mittal ने अपने निजी जीवन में भी कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उन्होंने अपने 24 वर्षीय बेटे को खो दिया। इसके बाद 2024 में उनके छोटे भाई का निधन हुआ और मई 2026 में उनकी मां का भी निधन हो गया।

इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उनका कहना है कि पत्नी और बेटी के सहयोग से वह समाज के लिए काम जारी रखेंगे। उनका मानना है कि जरूरतमंद बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना ही उनकी सबसे बड़ी संतुष्टि है।

बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण

Naresh Mittal का यह प्रयास दिखाता है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी कोई व्यक्ति समाज के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नौकरी छोड़कर दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए काम करने का उनका फैसला कई परिवारों के लिए उम्मीद का माध्यम बन रहा है।

Saha का Seva Dhaam Ashram फिलहाल सीमित संख्या में बच्चों को फिजियोथेरेपी उपलब्ध करा रहा है, लेकिन भविष्य में इसे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले बच्चों के लिए व्यापक पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

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