6 सितंबर 2026 पंजाब सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए जा रहे प्रयासों के दावों के बीच फगवाड़ा सब-डिवीजन के दो सरकारी मिडिल स्कूलों की स्थिति ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षक दिवस के मौके पर जमीनी स्थिति की पड़ताल के दौरान दोनों स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई। एक स्कूल में 144 विद्यार्थियों के लिए सिर्फ दो शिक्षक उपलब्ध हैं, जबकि दूसरे स्कूल में 70 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल एक नियमित शिक्षक के पास है।
खैरा स्कूल में एक भी नियमित शिक्षक नहीं
फगवाड़ा के पास खैरा स्थित सरकारी मिडिल स्कूल में 144 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, जिनमें 62 छात्राएं शामिल हैं। स्कूल में एक भी नियमित शिक्षक तैनात नहीं है। फिलहाल दूसरे सरकारी स्कूल से दो शिक्षकों को डेपुटेशन पर यहां पढ़ाने के लिए भेजा गया है।
इनमें साइंस विषय की शिक्षिका मनिंदर कौर और कंप्यूटर शिक्षिका सुरजीत कौर शामिल हैं। दोनों मूल रूप से सरकारी स्कूल भनोकी की नियमित कर्मचारी हैं और फिलहाल खैरा स्कूल में सेवाएं दे रही हैं।
स्कूल में नियमित चपरासी तक उपलब्ध नहीं है, जिससे शिक्षण के अलावा अन्य जरूरी कामों का भी दबाव स्कूल स्टाफ पर पड़ रहा है।
144 छात्रों के लिए सिर्फ दो शिक्षक
स्कूल में मौजूद शिक्षकों के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था विद्यार्थियों की संख्या के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, जिस स्टाफिंग मानक का हवाला दिया गया, उसमें करीब 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना चाहिए। ऐसे में 144 विद्यार्थियों के लिए सिर्फ दो शिक्षकों की व्यवस्था से विषयवार पढ़ाई कराना मुश्किल हो रहा है।
मनिंदर कौर के मुताबिक, पिछले शैक्षणिक सत्र में स्कूल में 174 विद्यार्थी नामांकित थे, लेकिन बाद में करीब 30 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ दिया। शिक्षकों की कमी को लेकर उच्च अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
शाम नगर स्कूल में भी यही स्थिति
फगवाड़ा के शाम नगर इलाके में स्थित एक अन्य सरकारी मिडिल स्कूल में भी शिक्षकों की कमी की गंभीर स्थिति सामने आई। यहां करीब 70 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, लेकिन केवल एक नियमित सरकारी शिक्षक उपलब्ध है।
स्कूल के प्रभारी और साइंस शिक्षक विपिन सोनी के मुताबिक, वह अकेले ही 70 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सरकारी स्कूल चाचोकी से एक शिक्षक सप्ताह में तीन दिन—गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार—स्कूल में आकर विद्यार्थियों को पढ़ाने में मदद करता है।
निजी शिक्षक की भी लेनी पड़ रही मदद
शिक्षकों की कमी के कारण स्कूल में अतिरिक्त व्यवस्था के तौर पर एक निजी शिक्षक की मदद भी ली जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, इस निजी शिक्षक का भुगतान सरकार की ओर से नहीं बल्कि फगवाड़ा के शिवपुरी स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु रविदास सभा की ओर से किया जा रहा है।
स्कूल प्रभारी ने बताया कि पर्याप्त सरकारी स्टाफ नहीं होने के कारण यह व्यवस्था जरूरी हो गई है। उन्होंने भी शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति के लिए उच्च अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे हैं।
पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर की चिंता
दोनों स्कूलों की स्थिति से यह सवाल उठता है कि इतनी कम संख्या में शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों को विषयवार और नियमित शिक्षा कैसे उपलब्ध कराई जा सकती है। शिक्षकों पर विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले अधिक जिम्मेदारी होने से व्यक्तिगत ध्यान देना, कक्षा प्रबंधन और नियमित शिक्षण जैसी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
खास तौर पर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले वे विद्यार्थी अधिक प्रभावित हो सकते हैं, जिनके पास शिक्षा के लिए दूसरे विकल्प सीमित हैं।
लंबे समय से खाली पदों का असर
स्कूलों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी रहने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ रही है। डेपुटेशन और निजी स्तर पर शिक्षक की व्यवस्था तत्काल जरूरत को पूरा कर सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए नियमित शिक्षकों की नियुक्ति जरूरी मानी जा रही है।
खैरा और शाम नगर के स्कूलों के शिक्षकों ने भी पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है।
शिक्षा विभाग से जवाब का इंतजार
रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों की कमी और स्वीकृत पदों, खाली पदों तथा उन्हें भरने के लिए उठाए जा रहे कदमों को लेकर वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।
ऐसे में फिलहाल विभाग की ओर से इन दोनों स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए क्या योजना है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
शिक्षा व्यवस्था पर जमीनी स्तर पर ध्यान देने की जरूरत
शिक्षक दिवस के अवसर पर सामने आई यह स्थिति सरकारी स्कूलों में घोषित शिक्षा सुधारों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को लेकर चर्चा बढ़ाती है। सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल बुनियादी ढांचे और योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षकों की उपलब्धता पर भी ध्यान देना जरूरी है।
