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हरियाणा के कर्ज पर CAG की बड़ी चिंता, पुराने कर्ज चुकाने में ही खर्च हो रहा उधार का बड़ा हिस्सा

5 सितंबर 2026   हरियाणा सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार द्वारा लिया जा रहा कर्ज बड़ी मात्रा में पुराने कर्ज की अदायगी और मौजूदा खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल हो रहा है, जबकि पूंजीगत खर्च के लिए उधार की अपेक्षाकृत कम राशि उपलब्ध रह रही है। CAG ने इसे राज्य के वित्तीय प्रबंधन और भविष्य की कर्ज स्थिरता के लिहाज से महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।

पुराने कर्ज चुकाने में जा रहा उधार का बड़ा हिस्सा

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020-25 के दौरान हरियाणा सरकार ने अपनी मौजूदा उधारी का लगभग 53 प्रतिशत से 67 प्रतिशत हिस्सा पुराने कर्ज के मूलधन की अदायगी में इस्तेमाल किया। इससे पहले 2015-16 से 2019-20 के दौरान यह हिस्सा करीब 19 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उधार की बड़ी रकम अगर पुराने कर्ज की अदायगी और राजस्व खर्चों में चली जाती है तो सरकार के पास विकास और नई परिसंपत्तियां बनाने के लिए वित्तीय गुंजाइश कम हो जाती है।

2024-25 में सिर्फ 14 फीसदी उधार पूंजीगत खर्च में

CAG ने विशेष रूप से वर्ष 2024-25 के आंकड़ों पर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान सरकार की मौजूदा उधारी का केवल 14 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत खर्च में इस्तेमाल हुआ।

पूंजीगत खर्च में सड़क, भवन, मशीनरी, उपकरण, निवेश और अन्य ऐसी गतिविधियां शामिल होती हैं जिनसे भविष्य में सरकारी परिसंपत्तियों और विकास क्षमता में बढ़ोतरी हो सकती है।

CAG के मुताबिक उधार की बड़ी राशि का इस्तेमाल वर्तमान खपत और पुराने कर्ज की अदायगी में होने से राज्य की वित्तीय गुंजाइश सीमित होती है और सामान्य जरूरतों के लिए कर्ज पर निर्भरता बढ़ती है।

हरियाणा की कुल वित्तीय देनदारियां बढ़ीं

रिपोर्ट में हरियाणा की कुल वित्तीय देनदारियों में भी तेज बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया है। CAG के अनुसार राज्य की कुल बकाया वित्तीय देनदारियां 2015-16 के अंत में करीब ₹1.21 लाख करोड़ थीं, जो 2024-25 के अंत तक बढ़कर ₹3.61 लाख करोड़ हो गईं।

इस अवधि में राज्य के कर्ज और देनदारियों में लगातार वृद्धि हुई। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का डेट-टू-GSDP अनुपात भी 24.36 प्रतिशत से 32.68 प्रतिशत के बीच रहा, जो राज्य की कर्ज स्थिरता पर लगातार दबाव को दर्शाता है।

आंतरिक कर्ज भी बढ़ा

CAG ने हरियाणा के आंतरिक कर्ज में हुई वृद्धि को भी रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य का आंतरिक कर्ज 2020-21 में ₹2.04 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹3.11 लाख करोड़ हो गया।

यानी इस अवधि में आंतरिक कर्ज में करीब ₹1.07 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2024-25 में ही आंतरिक कर्ज पर ब्याज के रूप में करीब ₹21,936 करोड़ का भुगतान किया गया।

आने वाले वर्षों में भी कर्ज चुकाने का दबाव

CAG ने आने वाले वर्षों में हरियाणा सरकार पर पड़ने वाले कर्ज भुगतान के दबाव को लेकर भी जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 से 2034-35 के बीच चुकाए जाने वाले करीब ₹3.16 लाख करोड़ के सार्वजनिक कर्ज में से ₹23,959 करोड़ की राशि 2025-26 में देय थी।

इसके अलावा करीब ₹1.28 लाख करोड़, यानी लगभग 40.55 प्रतिशत कर्ज, 2026-27 से 2031-32 के बीच चुकाना होगा। बाकी करीब 51.87 प्रतिशत, यानी लगभग ₹1.64 लाख करोड़, सात वर्ष से अधिक समय बाद देय होगा।

CAG के अनुसार अगले सात वर्षों में 2031-32 तक हर साल औसतन करीब ₹21,725 करोड़ सार्वजनिक कर्ज की अदायगी करनी होगी। इसके अतिरिक्त इसी कर्ज पर ब्याज का भुगतान भी करना होगा।

बढ़ती उधारी से वित्तीय दबाव की आशंका

CAG ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य को अपने संसाधनों की कमी पूरी करने के लिए लगातार नई उधारी करनी पड़ती है तो आने वाले समय में कर्ज और ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ सकता है।

इसका सीधा असर सरकार की वित्तीय गुंजाइश पर पड़ सकता है। ज्यादा रकम अगर पुराने कर्ज और ब्याज में चली जाती है तो शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और अन्य विकास कार्यों के लिए उपलब्ध धन पर दबाव पड़ सकता है।

सब्सिडी का खर्च भी बढ़ा

रिपोर्ट में हरियाणा के सब्सिडी खर्च का भी उल्लेख किया गया है। CAG के अनुसार राज्य का सब्सिडी बिल 2020-21 में ₹7,650 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹11,639 करोड़ हो गया।

ऐसे में कर्ज अदायगी, ब्याज भुगतान और सब्सिडी जैसे खर्चों के बीच सरकार के लिए विकास कार्यों पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना वित्तीय प्रबंधन की बड़ी चुनौती बन सकता है।

पूंजीगत खर्च में भी उतार-चढ़ाव

CAG के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा का पूंजीगत खर्च भी अलग-अलग वर्षों में उतार-चढ़ाव से गुजरा। वर्ष 2023-24 में यह करीब ₹19,976 करोड़ था, जो 2024-25 में घटकर ₹15,641 करोड़ रह गया।

रिपोर्ट में यह महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि सरकार द्वारा लिए गए कर्ज का इस्तेमाल अगर ज्यादा मात्रा में परिसंपत्ति निर्माण और विकास कार्यों में हो तो उससे भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

वित्तीय अनुशासन पर सवाल

CAG की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब हरियाणा की वित्तीय स्थिति और बढ़ती देनदारियों को लेकर चर्चा तेज है। CAG ने सीधे तौर पर राज्य सरकार की वित्तीय नीतियों पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि उधार की बड़ी रकम पुराने कर्ज और मौजूदा खर्चों को संभालने में जा रही है।

ऐसे में राज्य के लिए राजस्व बढ़ाने, अनावश्यक खर्च नियंत्रित करने और उधार के अधिक हिस्से को विकास एवं पूंजीगत परिसंपत्तियों के निर्माण में लगाने की जरूरत महत्वपूर्ण हो जाती है।

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