5 सितंबर 2026 हरियाणा में पिछले साल हुए दर्दनाक बास्केटबॉल हादसे के बाद अब खेल सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। रोहतक के लखन माजरा गांव में अभ्यास के दौरान 16 वर्षीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की बास्केटबॉल पोल गिरने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से गठित समिति ने खेल ढांचे की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की है।
अभ्यास के दौरान हुई थी हार्दिक राठी की मौत
लखन माजरा गांव में नवंबर 2025 में अभ्यास सत्र के दौरान बास्केटबॉल पोल गिरने से हार्दिक राठी की जान चली गई थी। हार्दिक की उम्र महज 16 वर्ष थी और वह बास्केटबॉल का उभरता हुआ खिलाड़ी था।
इस घटना ने खेल मैदानों और वहां मौजूद उपकरणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इससे पहले भी हरियाणा में बास्केटबॉल पोल गिरने की एक अन्य घटना में 15 वर्षीय खिलाड़ी अमन की मौत हुई थी। दोनों घटनाएं करीब 48 घंटे के अंतराल में हुई थीं।
खेल सुविधाओं के लिए अनिवार्य फिटनेस सर्टिफिकेट की सिफारिश
जिला प्रशासन की जांच समिति ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए खेल सुविधाओं की संरचनात्मक सुरक्षा को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया है।
समिति ने कहा है कि किसी भी खेल ढांचे को इस्तेमाल में लाने से पहले उसका Structural Fitness Certification कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही समय-समय पर दोबारा उसकी फिटनेस जांच भी होनी चाहिए।
इस व्यवस्था के तहत यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि किसी खेल सुविधा के रखरखाव, सुरक्षा और प्रमाणन की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था की है। यह व्यवस्था सुविधा के स्वामित्व से अलग सभी खेल परिसरों पर लागू करने की सिफारिश की गई है।
स्पोर्ट्स नर्सरी और कोचिंग सेंटरों की निगरानी बढ़ाने पर जोर
समिति ने स्पोर्ट्स नर्सरी और कोचिंग सेंटरों में रोजाना सुरक्षा निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने की बात कही है। मैदान स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
खेल उपकरणों और मैदान में मौजूद संभावित खतरों की समय रहते पहचान कर उन्हें ठीक करने की व्यवस्था भी जरूरी बताई गई है।
समिति ने ग्राम पंचायतों, नगर निगमों और अन्य भूमि मालिक संस्थाओं को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली खेल सुविधाओं की समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा करने की सिफारिश की है।
निजी कोच और खेल गतिविधियों के लिए बने नियम
लखन माजरा में हार्दिक समेत कई युवा एक निजी कोच से प्रशिक्षण ले रहे थे। इसे देखते हुए समिति ने निजी कोचों और खेल गतिविधियां संचालित करने वाले अन्य लोगों के लिए औपचारिक अनुमति और निगरानी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है।
समिति के अनुसार, खेल गतिविधि शुरू होने से पहले संबंधित पक्षों के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। इससे यह तय रहेगा कि मैदान, उपकरण और खिलाड़ियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होगी।
खेल नर्सरियों की मंजूरी को सुरक्षित ढांचे से जोड़ने की सिफारिश
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि Khel Nurseries को तभी मंजूरी दी जाए जब वहां सुरक्षित खेल ढांचा उपलब्ध हो। इसके साथ ही जमीन के स्वामित्व और निर्धारित सुरक्षा मानकों के पालन की भी पुष्टि की जाए।
यदि कोई खेल सुविधा ऐसी जमीन पर चल रही है जो संबंधित संस्था के स्वामित्व में नहीं है, तो जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के लिए औपचारिक समझौता या MoU किया जाना चाहिए।
पूरे जिले में खेल सुविधाओं का सेफ्टी ऑडिट
समिति ने रोहतक सहित पूरे जिले की खेल सुविधाओं का व्यापक सुरक्षा और संरचनात्मक ऑडिट कराने का सुझाव दिया है। यह ऑडिट अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के साथ एक निश्चित समय सीमा में पूरा करने की बात कही गई है।
साथ ही खेल सुविधाओं की नियमित जांच में सुरक्षा मानकों को अनिवार्य हिस्सा बनाने की सिफारिश की गई है। खिलाड़ियों और आम लोगों के लिए खेल ढांचे से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन या ऑनलाइन पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
हार्दिक के नाम पर इंडोर स्टेडियम की मांग अभी लंबित
हार्दिक राठी के परिवार की ओर से लखन माजरा में उसके नाम पर एक इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम बनाने की मांग की जा रही है। हार्दिक के पिता संदीप राठी के अनुसार, उन्होंने मुख्यमंत्री से कई बार मुलाकात कर यह मांग रखी है, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
गांव में बड़ी संख्या में युवा अब भी बास्केटबॉल का अभ्यास करते हैं। ऐसे में परिवार और स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि बेहतर और सुरक्षित खेल सुविधा युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होगी।
खिलाड़ियों की संस्था ने सामाजिक ऑडिट की मांग उठाई
पूर्व खिलाड़ियों और खेल क्षेत्र से जुड़े लोगों के संगठन Khel Khiladi Manch ने भी खेल सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। संगठन की अध्यक्ष और भीम अवॉर्डी जगमती सांगवान ने कहा कि हादसों के बाद जांच समितियां बनती हैं और सुधार के सुझाव दिए जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी सिफारिशें लागू नहीं हो पातीं।
संगठन ने हर जिले में खेल सुविधाओं का समय-समय पर सामाजिक ऑडिट कराने की मांग की है। उसका मानना है कि इसमें नागरिक समाज की भागीदारी से जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ सकती है तथा सुरक्षा जोखिमों की पहचान समय रहते की जा सकती है।
सुरक्षित खेल माहौल पर बढ़ा फोकस
हार्दिक राठी की मौत ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा मिलना कितना जरूरी है। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ मैदान, उपकरण और प्रशिक्षण केंद्रों की नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
समिति की सिफारिशों में फिटनेस प्रमाणन, जिम्मेदारी तय करना, नियमित निरीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और शिकायत व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं। इन सुझावों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो भविष्य में खेल मैदानों से जुड़े जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।
