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मोहाली कोर्ट ने ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में दो लोगों को सुनाई 3-3 साल की सजा

4 सितंबर 2026 पंजाब में ड्रग तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ी सफलता मिली है। मोहाली की विशेष Prevention of Money Laundering Act (PMLA) अदालत ने दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर ₹5,000-₹5,000 का जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला 3 सितंबर 2026 को सुनाया गया।

1.230 किलो कोकीन की बरामदगी से जुड़ा मामला

यह मामला पंजाब में 1.230 किलोग्राम कोकीन की बरामदगी से जुड़े ड्रग तस्करी के केस से सामने आया था। पंजाब पुलिस ने इस संबंध में Narcotic Drugs and Psychotropic Substances (NDPS) Act के तहत FIR दर्ज की थी।

इसी FIR के आधार पर ED ने Prevention of Money Laundering Act यानी PMLA के तहत अपनी जांच शुरू की। जांच का उद्देश्य केवल ड्रग्स की बरामदगी तक सीमित नहीं था, बल्कि उससे जुड़े कथित आर्थिक लेनदेन और अपराध से हासिल संपत्ति की भी पड़ताल करना था।

दोनों आरोपियों को NDPS मामले में भी दोषी ठहराया गया था

ED के मुताबिक, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से पहले दोनों आरोपियों को संबंधित मूल अपराध यानी scheduled offence में भी दोषी ठहराया जा चुका था।

दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह को NDPS Act की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। इसके बाद ड्रग तस्करी से जुड़े आर्थिक लेनदेन की जांच PMLA के तहत आगे बढ़ाई गई।

इस जांच में ED ने उन वित्तीय लेनदेन को सामने लाने की कोशिश की, जिन्हें ड्रग तस्करी से प्राप्त रकम या उससे जुड़े अपराध के आर्थिक लाभ से जोड़ा गया था।

₹10 लाख के दो चेक जांच में सामने आए

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के दौरान ED ने ₹6 लाख और ₹4 लाख के दो चेक का पता लगाया। दोनों चेक की कुल राशि ₹10 लाख थी।

ED के अनुसार, ये चेक उस लेनदेन से जुड़े थे, जिसका संबंध बरामद किए गए नशीले पदार्थों की डीलिंग से था। जांच एजेंसी ने इन वित्तीय दस्तावेजों को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में अदालत के सामने रखा।

अदालत ने इन चेक के साथ-साथ संबंधित contraband को भी PMLA के तहत “property” की परिभाषा में माना। अदालत के अनुसार, ये अपराध से जुड़े होने के कारण “proceeds of crime” की श्रेणी में आते हैं।

PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध

मोहाली की विशेष PMLA अदालत ने दोनों को PMLA की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया। इस अपराध के लिए सजा का प्रावधान धारा 4 में किया गया है।

अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और ड्रग तस्करी से जुड़े आर्थिक लेनदेन को ध्यान में रखते हुए दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई।

इसके अलावा दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

ड्रग तस्करी के आर्थिक नेटवर्क पर ED का फोकस

ED ने इस मामले को केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी का मामला नहीं माना, बल्कि उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क की जांच भी की। मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत जांच एजेंसी अपराध से अर्जित धन और संपत्ति के स्रोत का पता लगाने पर भी ध्यान देती है।

इस मामले में सामने आए ₹10 लाख के चेक को लेकर अदालत की टिप्पणी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे ड्रग तस्करी से जुड़े आर्थिक लेनदेन और “proceeds of crime” के बीच संबंध पर अदालत का रुख सामने आया है।

पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई के बीच फैसला

पंजाब में ड्रग तस्करी और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क के खिलाफ विभिन्न एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों का फोकस सिर्फ तस्करी में इस्तेमाल होने वाले नशीले पदार्थों की बरामदगी पर नहीं, बल्कि अपराध से उत्पन्न धन और संपत्ति के नेटवर्क को भी रोकने पर रहता है।

मोहाली की अदालत का यह फैसला इसी तरह के एक मामले में आया है, जहां ड्रग तस्करी के मूल मामले के साथ उसके कथित आर्थिक लाभ की भी जांच की गई।

मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में वित्तीय लेनदेन की अहमियत

मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में बैंकिंग लेनदेन, चेक, खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इस मामले में ED द्वारा सामने लाए गए दो चेक कुल ₹10 लाख के थे।

अदालत ने संबंधित संपत्ति और चेक को अपराध से जुड़े “proceeds of crime” के रूप में माना। इससे यह स्पष्ट होता है कि ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में आर्थिक लेनदेन की जांच भी आपराधिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

ED ने फैसले को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया

ED के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य ड्रग तस्करी को आर्थिक रूप से कमजोर करना है। एजेंसी का कहना है कि केवल नशीले पदार्थों की सप्लाई को रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन वित्तीय नेटवर्क को भी निशाना बनाना जरूरी है जो अवैध कारोबार को आर्थिक आधार प्रदान करते हैं।

दारा सिंह और गुरदर्शन सिंह को मिली सजा ऐसे ही मामले में हुई है, जिसमें ड्रग तस्करी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच PMLA के तहत की गई।

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