3 सितंबर 2026 पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) के बकाये को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने स्थिति को संभालने की कोशिश तेज कर दी है। 8 सितंबर को प्रस्तावित कर्मचारियों के बड़े विरोध प्रदर्शन से पहले पंजाब सरकार ने तीन वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को कर्मचारियों और पेंशनरों से बातचीत के लिए आगे किया है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, उद्योग एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री अमन अरोड़ा और सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने गुरुवार को चंडीगढ़ में संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। मंत्रियों ने सरकार के वेतन, DA और बकाया भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कर्मचारी संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया।
करीब 7.50 लाख कर्मचारी और पेंशनर विवाद के केंद्र में
DA बकाये को लेकर पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ रही है। सरकार के मुताबिक करीब 7.50 लाख कर्मचारी और पेंशनर इस विवाद से प्रभावित हैं।
इससे पहले 27 अगस्त को बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों ने लंबित DA बकाये समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सामूहिक आकस्मिक अवकाश लिया था। इसके बाद सरकार ने प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे।
अब कर्मचारी संगठनों ने 8 सितंबर को एक और बड़े सामूहिक अवकाश और विरोध का ऐलान किया है। इसी को देखते हुए सरकार की ओर से बातचीत की कोशिश की जा रही है।
हरपाल चीमा ने बताया सरकार का पक्ष
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार अपने राजस्व का करीब 51 प्रतिशत हिस्सा वेतन और पेंशन पर खर्च कर रही है। उनके मुताबिक यह देश के राज्यों के औसत करीब 38 प्रतिशत से अधिक है।
उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब का अपना टैक्स राजस्व राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है। ऐसे में वेतन और पेंशन पर होने वाला खर्च राज्य के वित्तीय संसाधनों पर काफी दबाव डालता है।
चीमा ने बताया कि 2022 के बाद पंजाब सरकार ने DA में कुल 14 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी की है। उनके अनुसार अक्टूबर 2022 में DA 28 से बढ़ाकर 34 प्रतिशत, दिसंबर 2023 में 38 प्रतिशत और नवंबर 2024 में 42 प्रतिशत किया गया।
सरकार ने पिछली सरकारों पर बकाया विरासत में मिलने का लगाया दावा
DA बकाये को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि करीब ₹14,191 करोड़ की देनदारी पिछली सरकारों से विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि यह देनदारी मौजूदा सरकार ने पैदा नहीं की, बल्कि उसे पहले की सरकारों से मिली है।
चीमा के मुताबिक पिछली सरकारों में कांग्रेस और SAD-BJP शासन के दौरान यह देनदारी बनी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने इस बकाये के भुगतान को लेकर योजना तैयार की है और अदालत की ओर से स्वीकार किए गए लिक्विडेशन प्लान के अनुसार भुगतान किया जा रहा है।
₹4,500 करोड़ से ज्यादा भुगतान का दावा
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया कि सरकार अब तक कर्मचारियों और पेंशनरों को विरासत में मिली DA देनदारी में से ₹4,500 करोड़ से अधिक जारी कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार बकाये का भुगतान मासिक किस्तों के जरिए कर रही है। चीमा ने यह भी दावा किया कि पिछली किसी सरकार ने लंबित DA बकाये को चुकाने की प्रतिबद्धता नहीं जताई थी, जबकि मौजूदा सरकार ने इसके भुगतान का वादा किया है।
सुप्रीम कोर्ट में SLP के बाद बढ़ा विवाद
DA विवाद के बीच पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की है, जिसमें राज्य सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित DA बकाये का भुगतान करने के लिए कहा गया था।
इसी बीच कर्मचारी संगठनों की ओर से 8 सितंबर को फिर बड़े स्तर पर विरोध की तैयारी की जा रही है। ऐसे में सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत इस विवाद को शांत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
तीन मंत्रियों ने कर्मचारियों से बातचीत का दिया न्योता
सरकार की ओर से अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों और पेंशनरों को बातचीत के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कर्मचारियों को सरकार की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि, अरोड़ा ने विपक्षी दलों पर कर्मचारियों को राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए भी काम कर रही है।
DA बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी
कर्मचारी संगठनों की मुख्य मांग लंबित DA बकाये के भुगतान और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के समान DA दर से जुड़ी है। सरकार का कहना है कि राज्य के नियमों में पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र के समान DA देना अनिवार्य नहीं है।
डॉ. बलजीत कौर ने भी कहा कि राज्य सरकार 2021 में बनाए गए संबंधित नियमों के अनुसार DA का भुगतान कर रही है और इन नियमों में केंद्र सरकार के समान दर पर DA देना अनिवार्य नहीं किया गया है।
8 सितंबर के प्रदर्शन पर नजर
अब सभी की नजर 8 सितंबर को प्रस्तावित कर्मचारी विरोध प्रदर्शन पर है। 27 अगस्त के सामूहिक अवकाश के बाद यदि कर्मचारी संगठन दोबारा बड़े स्तर पर आंदोलन करते हैं, तो सरकार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौती बढ़ सकती है।
वहीं सरकार बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने का प्रयास कर रही है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वह कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने वाले हैं। इससे संकेत मिलता है कि सरकार बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहती है।
सरकार के सामने वित्तीय दबाव भी चुनौती
DA बकाये के भुगतान के साथ-साथ पंजाब सरकार के सामने वित्तीय प्रबंधन की चुनौती भी बनी हुई है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन एवं पेंशन पर पहले से ही राजस्व का बड़ा हिस्सा खर्च हो रहा है।
अमन अरोड़ा ने कहा कि DA को आवश्यक स्तर तक बढ़ाने पर सालाना करीब ₹6,500 करोड़ का अतिरिक्त खर्च हो सकता है। सरकार का तर्क है कि इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
