2 सितंबर 2026 दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन की अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। हुसैन ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने जेल अधिकारियों से ताहिर हुसैन की नॉमिनल रोल भी रिकॉर्ड पर पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों—नाजिम, कासिम, जावेद और अनस—को अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 31 जुलाई को अदालत ने पांचों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन को हत्या समेत भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इनमें धारा 302, 365, 147, 148, 153A और 188 के साथ धारा 149 भी शामिल थी।
अभियोजन पक्ष ने मामले में दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों में सुधार की कोई संभावना नहीं है।
हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई?
हाईकोर्ट में ताहिर हुसैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव मोहन पेश हुए। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि हुसैन को केवल एक मामले में मुख्य अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है, जबकि अन्य अपराधों में उनकी भूमिका को सहायता या उकसावे के रूप में माना गया है।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के एक गवाह के बयान से संबंधित साक्ष्य का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया। इसी आधार पर दोषसिद्धि को चुनौती दी गई है।
जांच पर भी उठाए सवाल
ताहिर हुसैन की अपील में जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं। उनकी ओर से दावा किया गया है कि जांच की शुरुआत से ही उन्हें मामले में फंसाने का प्रयास किया गया और सार्वजनिक गुस्से को शांत करने के लिए उन्हें निशाना बनाया गया।
अपील में FIR और गवाहों से जुड़े साक्ष्यों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये सभी ताहिर हुसैन की ओर से हाईकोर्ट में की गई दलीलें हैं और इन पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन की अपील पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजत नायर और अधिवक्ता ध्रुव पांडे अदालत में पेश हुए।
पुलिस की ओर से कहा गया कि इस मामले से जुड़ी अन्य अपीलों के साथ हुसैन की अपील पर भी सुनवाई की जाए। अदालत ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए मामले को अन्य संबंधित अपीलों के साथ 2 दिसंबर को सूचीबद्ध किया है।
अंकित शर्मा की हत्या का मामला
अंकित शर्मा की हत्या फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, वह दयालपुर इलाके में लापता हुए थे और बाद में उनका शव चांदबाग इलाके में एक नाले से बरामद किया गया था।
मामले की जांच के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि अंकित शर्मा पर दंगाई भीड़ ने हमला किया था और बाद में उनके शव को नाले में फेंक दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर धारदार और कुंद हथियारों से लगी 51 चोटों का उल्लेख किया गया था।
पांच आरोपियों को मिली उम्रकैद
ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन के साथ नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भी दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं, इस मामले में छह अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था।
दिल्ली पुलिस ने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
अब 2 दिसंबर को होगी सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने ताहिर हुसैन की अपील को स्वीकार करते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। अदालत ने जेल प्रशासन से नॉमिनल रोल और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को भी कहा है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी। उस दौरान दिल्ली पुलिस हाईकोर्ट के सामने ताहिर हुसैन की अपील पर अपना पक्ष रखेगी। इसके साथ ही नाजिम और कासिम समेत अन्य दोषियों की संबंधित अपीलों पर भी सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट के फैसले पर नजर
हाईकोर्ट में अपील स्वीकार होने का अर्थ यह नहीं है कि ट्रायल कोर्ट की दोषसिद्धि रद्द हो गई है। फिलहाल ताहिर हुसैन की ओर से दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती दी गई है और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा गया है।
आगे की सुनवाई में अदालत अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। मामले में हाईकोर्ट का अंतिम फैसला आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण होगा।
