22 अगस्त 2026 हरियाणा के नूंह जिले में शिक्षकों द्वारा कुछ सरकारी जिम्मेदारियां निभाने से इनकार किए जाने का मामला चर्चा में है। शिक्षकों का कहना है कि उन्हें पहले से ही पढ़ाई और स्कूल से जुड़े कई काम संभालने पड़ते हैं, ऐसे में अतिरिक्त गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां उनके काम का बोझ बढ़ा रही हैं।
मामला क्या है?
नूंह में शिक्षकों को शिक्षा विभाग के नियमित कार्यों के अलावा अलग-अलग प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां भी दी जाती रही हैं। इन कामों में सर्वे, सरकारी योजनाओं से जुड़ा डेटा जुटाना, विभिन्न अभियानों में ड्यूटी और अन्य प्रशासनिक कार्य शामिल हो सकते हैं।
शिक्षकों के एक वर्ग का तर्क है कि ऐसी जिम्मेदारियों के कारण उनका मुख्य काम यानी छात्रों को पढ़ाना और उनकी शैक्षणिक प्रगति पर ध्यान देना प्रभावित होता है।
शिक्षकों ने क्यों जताई आपत्ति?
शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में पहले से स्टाफ की कमी और काम का दबाव है। ऐसे में अतिरिक्त ड्यूटी मिलने से उनके पास पाठ्यक्रम पूरा करने, विद्यार्थियों की कॉपियां जांचने और कमजोर छात्रों पर व्यक्तिगत ध्यान देने के लिए कम समय बचता है।
उनका कहना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए अलग कर्मचारियों या संबंधित विभागों की व्यवस्था की जानी चाहिए।
नूंह में समस्या ज्यादा अहम क्यों?
नूंह हरियाणा के उन जिलों में शामिल है जहां शिक्षा व्यवस्था को कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों तक पहुंच, शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति जैसे मुद्दे पहले से महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लगाने के बजाय स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
प्रशासन के सामने क्या चुनौती है?
सरकार और जिला प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों के लिए कर्मचारियों की जरूरत भी होती है, लेकिन स्कूल शिक्षकों को लगातार गैर-शैक्षणिक काम सौंपने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है।
इसलिए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है जिसमें जरूरी सरकारी कार्य भी पूरे हों और शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व—पढ़ाई—भी प्रभावित न हो।
आगे क्या होगा?
अब इस मुद्दे पर शिक्षकों और प्रशासन के बीच बातचीत से समाधान निकालने की जरूरत है। यदि गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों को कम किया जाता है और वैकल्पिक स्टाफ की व्यवस्था होती है, तो शिक्षक अपना अधिक समय विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों को दे सकेंगे।
कुल मिलाकर, नूंह में शिक्षकों का ‘नहीं’ कहना केवल अतिरिक्त ड्यूटी का विरोध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की प्राथमिक भूमिका को लेकर उठाया गया सवाल है।
