लुधियाना 18 अगस्त 2026 : पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड द्वारा कंपल्सरी सी.पी.डी. ट्रेनिंग वर्कशॉप के बाद राज्य के शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच ए.आई. (आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस) की नई योजना को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। सरकार द्वारा 8वीं से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ए.आई. की शिक्षा शुरू करने की तैयारी की गई है। 1 सितम्बर से शुरू होने जा रही इस योजना के तहत पी.एस.ई.बी. से एफिलिएटेड सभी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए 100 रुपए प्रति महीना फीस का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि सरकारी स्कूलों में इसे फ्री रखने की बात कही जा रही है। इस पूरे प्रोजेक्ट का संचालन सिंगापुर की एक निजी कंपनी द्वारा किया जाएगा। सी.बी.एस.ई. और एन.सी.ई.आर.टी. की नीतियों से अलग हटकर शुरू किए जा रहे इस कोर्स में 35 से 40 मिनट की ऑनलाइन क्लास होगी। बोर्ड को उम्मीद है कि 8वीं से 12वीं कक्षा के लगभग 80 प्रतिशत विद्यार्थी इसमें हिस्सा लेंगे।
रजिस्ट्रेशन, टैस्ट, किताबों और अध्यापकों की ट्रेनिंग का शुल्क
विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन ‘सरबत ए.आई. पोर्टल’ पर करवाया जाएगा जहां 100 रुपए प्रति महीना फीस का प्रावधान है। इसके अलावा साल में 3 बार होने वाले पेपरों के लिए 50 रुपए, 2 यूनिट टैस्टों के लिए 10 रुपए और किताब के लिए 73 रुपये प्रति विद्यार्थी शुल्क तय किया जा रहा है। योजना के तहत हर स्कूल से 2 अध्यापकों को ट्रेंड करने का प्लान है। अध्यापकों की 4 हफ्तों की ट्रेनिंग का पहले साल का शुल्क 800 रुपए रखा गया है, जबकि 3 सालों में पूरी ट्रेनिंग के दौरान प्रति टीचर कुल 21,000 रुपए का खर्चा तय किया गया है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी और ऑनलाइन पढ़ाई का दबाव
40 मिनट की ऑनलाइन क्लास के बाद विद्यार्थियों को घर पर सैल्फ स्टडी के लिए मोबाइल और लैपटॉप की जरूरत पड़ेगी। इसके साथ ही कई स्कूलों में कम्प्यूटर लैब्स और इंटरनैट कनैक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। ऐसी स्थिति में इसे अचानक लागू करने से विद्यार्थियों के परिवारों पर आर्थिक दबाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ट्रेनिंग वर्कशॉप के दौरान जब अध्यापकों ने इन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए, तो अधिकारियों ने उन्हें केवल टैक्निकल विषय पर ही बात करने के लिए कहा।
सत्र के बीच लागू करने से पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
शैक्षणिक सत्र के 5 महीने बीत जाने के बाद सितम्बर में इसे लागू करने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता जताई जा रही है। एक तरफ जहां फीस वृद्धि पर रोक की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ पी.एस.ई.बी. से संबद्ध स्कूलों के परिवारों और अध्यापकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है। इसी कारण अध्यापकों और अभिभावकों ने मांग की है कि इस योजना, रजिस्ट्रेशन और पेड ट्रेनिंग की प्रक्रिया की पुनर्समीक्षा की जानी चाहिए।
