चंडीगढ 09 अगस्त 2026 : हरियाणा में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत सीटों की घोषणा और स्कूलों की मान्यता को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में आरटीई सीटों की घोषणा नहीं करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। विभागीय पत्रों के अनुसार कुल 396 निजी स्कूलों के मामले कार्रवाई के दायरे में आए हैं। इनमें एक पत्र में 269 स्कूलों के मान्यता संबंधी दस्तावेज जिला स्तरीय कमेटी द्वारा रिजेक्ट किए जाने का उल्लेख है, जबकि दूसरे पत्र में 127 स्कूलों के दस्तावेज खारिज किए जाने की जानकारी दी गई है।
आरटीई सीटों की घोषणा नहीं करना पड़ा भारी
मौलिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देशों में कहा गया है कि रिजेक्ट किए गए स्कूलों की वास्तविक स्थिति की दोबारा पुष्टि कराई जाए। विभाग के अनुसार सत्र 2026-27 में आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त स्कूलों में पहली और उससे ऊपर की कक्षाओं में दाखिले की प्रक्रिया के दौरान आरटीई सीटों की घोषणा कराई गई थी।
इसी प्रक्रिया के बाद जिला स्तरीय कमेटियों ने स्कूलों के मान्यता संबंधी दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान आरटीई सीट घोषणा और मान्यता की शर्तों से जुड़े मामलों में कई स्कूलों के दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया गया।
396 स्कूलों के मामले सामने आने से विभाग में हलचल
दो अलग-अलग विभागीय पत्रों में सामने आए आंकड़ों के अनुसार 396 स्कूल कार्रवाई की जद में हैं। पहले पत्र में 269 स्कूलों के मामले जिला स्तरीय कमेटी द्वारा रिजेक्ट किए जाने का उल्लेख है। इसके बाद संबंधित स्कूलों के एमआईएस पोर्टल बंद किए गए थे। दूसरे पत्र में 127 स्कूलों के दस्तावेज रिजेक्ट किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें कुछ स्कूल ऐसे भी बताए गए हैं, जिन्होंने आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर अंतिम रूप से सबमिट नहीं किए थे। अब विभाग इन सभी मामलों में वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने में जुटा है।
11 अगस्त तक बताना होगा—किस कक्षा तक है मान्यता
शिक्षा विभाग ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को 11 अगस्त तक रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को संबंधित स्कूलों से यह पुष्टि करवानी होगी कि उनके पास कक्षा पहली से पांचवीं तक की मान्यता है या नहीं। इसके साथ ही ऐसे स्कूलों की भी अलग से जानकारी मांगी गई है, जिनके पास छठी कक्षा या उससे ऊपर की कक्षाओं के संचालन की मान्यता है, लेकिन वे पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं संचालित नहीं कर रहे हैं।
मान्यता है तो प्रमाण दें, नहीं है तो स्थिति साफ करें
विभाग ने स्कूलों की जानकारी निर्धारित प्रोफार्मा में भेजने को कहा है। इसमें स्कूल क्रमांक, नाम, पता, स्कूल कोड, मान्यता अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र का स्तर, मान्यता स्थायी है या अस्थायी तथा मान्यता प्रमाण पत्र की प्रति सहित अन्य विवरण मांगे गए हैं। इस कवायद का मकसद यह स्पष्ट करना है कि कौन से निजी स्कूल वास्तव में कक्षा पहली से पांचवीं तक मान्यता प्राप्त हैं और कौन से स्कूल केवल ऊपरी कक्षाओं की मान्यता के आधार पर संचालित हो रहे हैं।
दस्तावेज पूरे मिले तो खुल सकता है एमआईएस पोर्टल
विभागीय निर्देशों के अनुसार रिजेक्ट किए गए स्कूलों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद उनके एमआईएस पोर्टल खोलने को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जिन स्कूलों के पास निर्धारित मान्यता और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध पाए जाएंगे, उनके मामलों की दोबारा जांच के बाद विभाग निर्णय लेगा।
वहीं, दूसरे विभागीय पत्र में 35 स्कूलों द्वारा दस्तावेज पोर्टल पर फाइनल सबमिट नहीं किए जाने का भी उल्लेख है। इन स्कूलों की स्थिति की भी पुष्टि कराई जा रही है। यानी शिक्षा विभाग अब आरटीई सीट घोषणा, मान्यता और दस्तावेजों की ऑनलाइन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर हुई कमी को लेकर स्कूलों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
