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सबसे कम वन क्षेत्र के बावजूद हरियाणा में 3 वर्षों में 547 हेक्टेयर वन भूमि का बदला उपयोग

28 जुलाई 2026 :  देश में अपेक्षाकृत सबसे कम वन क्षेत्र वाले राज्यों में शामिल हरियाणा में पिछले तीन वर्षों के दौरान 547 हेक्टेयर वन भूमि का गैर-वानिकी कार्यों के लिए उपयोग किए जाने का मामला सामने आया है। इस आंकड़े ने पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र के संतुलन को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस अवधि में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि के उपयोग की मंजूरी दी गई। इनमें सड़क, बुनियादी ढांचा, सार्वजनिक सुविधाएं और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। हालांकि, प्रत्येक प्रस्ताव को लागू नियमों और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के तहत मंजूरी दी गई।

पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा में पहले से ही वन क्षेत्र सीमित है। ऐसे में वन भूमि का गैर-वानिकी उपयोग पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और हरित आवरण पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। उनका मानना है कि विकास परियोजनाओं के साथ-साथ वन संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

संतुलित विकास पर जोर

पर्यावरण विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जिन परियोजनाओं के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाता है, उनके साथ प्रभावी प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) और हरित क्षेत्र बढ़ाने के उपाय भी सुनिश्चित किए जाएं, ताकि पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई हो सके।

सरकार का फोकस हरित आवरण बढ़ाने पर

राज्य सरकार का कहना है कि विकास कार्यों के साथ-साथ हरियाणा में वृक्षारोपण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना है।

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