24 जुलाई 2026 : छात्रों के हालिया आंदोलन को लेकर गीतांजलि आंग्मो ने केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते, तो छात्रों का प्रदर्शन टाला जा सकता था। उन्होंने कहा कि छात्रों की चिंताओं को शुरुआती स्तर पर गंभीरता से लिया जाना चाहिए था।
गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को सुनना और उनकी मांगों पर समयबद्ध तरीके से संवाद करना आवश्यक है। उनका मानना है कि समय पर बातचीत और निर्णय लेने से स्थिति तनावपूर्ण होने से बच सकती थी।
संवाद की कमी बनी वजह
उन्होंने कहा कि छात्रों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर यदि संबंधित पक्षों के बीच पहले ही सार्थक संवाद होता, तो आंदोलन की नौबत नहीं आती। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की।
छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देने की मांग
गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में राजनीतिक टकराव के बजाय छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
शांतिपूर्ण समाधान की अपील
उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील करते हुए सरकार से भी आग्रह किया कि वह संवाद के रास्ते को प्राथमिकता दे। उनका कहना था कि संवेदनशील मुद्दों का समाधान आपसी विश्वास और बातचीत से ही संभव है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बीच गीतांजलि आंग्मो ने सभी पक्षों से संयम बरतने और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए रचनात्मक समाधान तलाशने की अपील की।
