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‘सतलुज’ विवाद की पूरी कहानी: सेंसरशिप, OTT से हटने और विरोध प्रदर्शन तक जानिए सब कुछ

8 जुलाई 2026  अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने और फिर 48 घंटे के भीतर भारत में हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता गया। इसके बाद सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और फिल्म के विषय को लेकर बहस तेज हो गई है।

यह फिल्म मूल रूप से ‘पंजाब ’95’ नाम से बनाई गई थी और इससे पहले इसका कार्यकारी शीर्षक ‘घल्लूघारा’ भी था। फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित है। इसमें पंजाब के उग्रवाद के दौर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और गुमशुदगी के मामलों को कहानी का आधार बनाया गया है।

फिल्म कई वर्षों तक सेंसर बोर्ड की मंजूरी के इंतजार में रही। रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म में बड़ी संख्या में बदलाव और कट लगाने का सुझाव दिया था। इन मुद्दों को लेकर फिल्म निर्माताओं और अधिकारियों के बीच लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया चली, जिसके कारण फिल्म की रिलीज में वर्षों की देरी हुई।

आखिरकार फिल्म जुलाई 2026 में बिना किसी बड़े प्रचार के ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई। हालांकि रिलीज के दो दिन के भीतर ही इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। ZEE5 ने अपने बयान में कहा कि “वर्तमान परिस्थितियों” के चलते फिल्म फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं रहेगी और वह उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए इसे दोबारा उपलब्ध कराने के प्रयास करेगा।

फिल्म हटाए जाने के बाद अभिनेता दिलजीत दोसांझ, निर्देशक हनी त्रेहान और कई फिल्मी हस्तियों ने इस पर प्रतिक्रिया दी। दिलजीत ने कहा कि उन्हें पहले से आशंका थी कि फिल्म को हटाया जा सकता है, जबकि निर्देशक ने बताया कि यह परियोजना कई वर्षों के संघर्ष के बाद दर्शकों तक पहुंची थी।

विवाद के बाद पंजाब और दिल्ली सहित कई स्थानों पर फिल्म के समर्थन में सार्वजनिक स्क्रीनिंग आयोजित करने की घोषणाएं की गईं। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने भी फिल्म की स्क्रीनिंग कराने की बात कही, जबकि पंजाब में कुछ संगठनों ने फिल्म को फिर से उपलब्ध कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए।

इस बीच कई फिल्मकारों और कलाकारों ने भी फिल्म हटाए जाने पर चिंता जताई। कुछ ने इसे रचनात्मक अभिव्यक्ति से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि अन्य ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। दूसरी ओर, अधिकारियों का कहना है कि फिल्म से जुड़े सभी मामलों का निपटारा संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार किया जाएगा।

फिलहाल ‘सतलुज’ भारत में ओटीटी पर उपलब्ध नहीं है और इसके दोबारा रिलीज होने को लेकर कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। फिल्म को लेकर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है, जबकि दर्शकों और फिल्म जगत की नजर इसके अगले घटनाक्रम पर बनी हुई है।

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