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पंजाब में धान की सीधी बुवाई का रकबा बढ़ा, लेकिन लक्ष्य से पीछे रहा राज्य

 29 जून 2026 : पंजाब में पानी बचाने वाली धान की सीधी बुवाई तकनीक (Direct Seeding of Rice-DSR) को लेकर किसानों की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा तय लक्ष्य अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। इस खरीफ सीजन में DSR के तहत करीब 3.41 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की बुवाई हुई, जबकि लक्ष्य 5 लाख एकड़ रखा गया था।

कृषि विभाग के अनुसार, इस साल करीब 26,896 किसानों ने DSR तकनीक को अपनाया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जब लगभग 2.93 लाख एकड़ क्षेत्र में यह तकनीक अपनाई गई थी।

32 फीसदी लक्ष्य से पीछे रहा पंजाब

राज्य सरकार ने पानी की बचत और भूजल संकट को देखते हुए DSR को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख एकड़ का लक्ष्य तय किया था। हालांकि, मौजूदा आंकड़ों के अनुसार राज्य करीब 3.41 लाख एकड़ तक ही पहुंच पाया, जिससे लक्ष्य में लगभग 32 फीसदी की कमी रह गई।

सरकार की ओर से किसानों को DSR अपनाने के लिए प्रति एकड़ 1,500 रुपये की आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इस योजना के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

DSR से पानी और मजदूरी की बचत

धान की पारंपरिक खेती में पहले नर्सरी तैयार करके पौधों की रोपाई की जाती है, जबकि DSR में बीज सीधे खेत में बोया जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इससे पानी की खपत और मजदूरी लागत में कमी आ सकती है।

पंजाब में लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए सरकार लंबे समय से किसानों को इस तकनीक की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।

किसानों की चिंताएं भी बनी चुनौती

हालांकि, कई किसान अभी भी पारंपरिक रोपाई को प्राथमिकता देते हैं। कुछ किसानों को DSR में खरपतवार नियंत्रण, शुरुआती अंकुरण और फसल प्रबंधन को लेकर चिंता रहती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि DSR को सफल बनाने के लिए किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, सही समय पर बुवाई और बेहतर मार्गदर्शन की जरूरत है।

सरकार ने बढ़ाई जागरूकता

कृषि विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाएं और पंजीकरण व भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाएं। अधिकारियों का कहना है कि आगे चलकर DSR का क्षेत्र और बढ़ सकता है।

पंजाब के लिए DSR केवल खेती की नई तकनीक नहीं, बल्कि पानी बचाने और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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