11 जून 2026 : Maharashtra में मानसून आने से पहले जल भंडारण की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। राज्य के बांधों में कुल उपयोगी जल भंडारण केवल 25 प्रतिशत के आसपास रह गया है, जिससे पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई प्रमुख जलाशयों और बांधों में पानी का स्तर लगातार घटा है। यदि मानसून में देरी होती है या सामान्य से कम वर्षा होती है, तो कुछ क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
क्षेत्रवार स्थिति
- मराठवाड़ा: सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल, कई बांधों में जल स्तर काफी कम।
- विदर्भ: कुछ जलाशयों में संतोषजनक भंडारण, लेकिन कई जिलों में जल स्तर घटा है।
- पश्चिम महाराष्ट्र: बड़े बांधों के कारण स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर, फिर भी भंडारण में कमी दर्ज की गई।
- उत्तर महाराष्ट्र: कई स्थानों पर जल उपलब्धता को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है।
- कोंकण: स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर, लेकिन क्षेत्र मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति राज्य की जल स्थिति तय करेगी। यदि समय पर और सामान्य वर्षा होती है, तो बांधों में जल भंडारण तेजी से बढ़ सकता है और राहत मिल सकती है।
प्रशासन ने स्थानीय निकायों और जिला अधिकारियों को जल प्रबंधन की तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नागरिकों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और अनावश्यक बर्बादी से बचने की अपील की गई है।
कृषि क्षेत्र भी मानसून पर निर्भर है, इसलिए किसान समुदाय की नजर अब बारिश की शुरुआत और उसके वितरण पर टिकी हुई है। आगामी कुछ सप्ताह महाराष्ट्र की जल स्थिति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
