24 मई 2026 : एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले में गवर्निंग बॉडी ने दयाल कॉलेज का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद संस्थान में नया विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि कुछ सदस्यों ने दावा किया है कि उनके द्वारा दर्ज की गई असहमति (dissent note) को नजरअंदाज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में नाम परिवर्तन से जुड़े प्रस्ताव पर लंबी चर्चा हुई। बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को पारित कर दिया गया, जिसके बाद कॉलेज का नया नाम लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, इस फैसले ने संस्थान के भीतर और बाहर बहस छेड़ दी है।
गवर्निंग बॉडी के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया है कि निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही और उनकी आपत्तियों को उचित महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि कॉलेज के ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इस तरह के बदलाव से पहले और व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था।
दूसरी ओर, प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सदस्यों का कहना है कि नाम परिवर्तन संस्थान के आधुनिकीकरण और नई पहचान देने के उद्देश्य से किया गया है। उनका मानना है कि यह कदम कॉलेज की नई शैक्षणिक दिशा और भविष्य की योजनाओं के अनुरूप है।
इस निर्णय के बाद छात्रों और पूर्व छात्रों के बीच भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं, जबकि कई लोग कॉलेज की पुरानी पहचान को बनाए रखने के पक्ष में हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।
शिक्षाविदों का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का नाम उसकी विरासत और पहचान से जुड़ा होता है, इसलिए ऐसे फैसलों में सभी हितधारकों की राय लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि पारदर्शी प्रक्रिया और व्यापक संवाद से ही ऐसे विवादों से बचा जा सकता है।
फिलहाल कॉलेज प्रशासन ने कहा है कि वह सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। मामले में अंतिम निर्णय और लागू होने की तारीख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
