18 मई 2026 : दिल्ली में एंड-ऑफ-लाइफ (EOL) यानी तय आयु पूरी कर चुके वाहनों को हटाने की नीति फिलहाल केवल एक चालू स्क्रैपिंग सुविधा पर निर्भर बताई जा रही है। इस स्थिति ने नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और पुराने वाहनों के प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, राजधानी में प्रदूषण कम करने और पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के उद्देश्य से एंड-ऑफ-लाइफ वाहन नीति लागू की गई थी। इसके तहत निर्धारित समय सीमा पूरी कर चुके वाहनों को स्क्रैपिंग केंद्रों के माध्यम से हटाया जाना है।
हालांकि, वर्तमान में केवल एक ही स्क्रैपिंग सुविधा के संचालन में होने की बात सामने आने से वाहन मालिकों और संबंधित एजेंसियों के सामने व्यावहारिक चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली जैसे बड़े महानगर में लाखों पुराने वाहनों के प्रबंधन के लिए पर्याप्त संख्या में अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्रों की आवश्यकता होती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने वाहन वायु प्रदूषण का बड़ा कारण माने जाते हैं। इसलिए वैज्ञानिक तरीके से वाहन स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।
दिल्ली सरकार और संबंधित विभागों की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन स्क्रैपिंग ढांचे की सीमित क्षमता नीति के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकती है।
वाहन मालिकों का कहना है कि यदि स्क्रैपिंग सुविधाएं सीमित रहेंगी तो प्रक्रिया में देरी, लंबी प्रतीक्षा और प्रशासनिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन स्क्रैपिंग नीति को प्रभावी बनाने के लिए निजी और सरकारी साझेदारी के माध्यम से अधिक सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता है।
भारत में वाहन स्क्रैपिंग नीति को पर्यावरण संरक्षण, धातु पुनर्चक्रण और सड़क सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल, संबंधित विभाग स्क्रैपिंग सुविधाओं के विस्तार और नीति के बेहतर क्रियान्वयन पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में नई सुविधाओं के शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि प्रदूषण नियंत्रण और पुराने वाहनों के प्रबंधन के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे का होना कितना जरूरी है।
