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महाराष्ट्र की आंगनवाड़ी सेविकाओं ने अतिरिक्त कार्यभार के विरोध में जनगणना ड्यूटी ठुकराई

18 मई 2026 :  महाराष्ट्र में करीब डेढ़ लाख आंगनवाड़ी सेविकाओं ने जनगणना कार्य करने से इनकार करते हुए सरकार से अतिरिक्त काम का बोझ न डालने की अपील की है। इस मुद्दे के सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

आंगनवाड़ी सेविकाओं का कहना है कि उन पर पहले से ही कई जिम्मेदारियां हैं, जिनमें बच्चों के पोषण कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं की निगरानी, टीकाकरण समन्वय, स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल है। ऐसे में जनगणना जैसे बड़े कार्य की जिम्मेदारी संभालना मुश्किल हो सकता है।

आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि सेविकाएं लंबे समय से मानदेय वृद्धि, नियमितीकरण और बेहतर सुविधाओं की मांग करती रही हैं। उनका आरोप है कि समस्याओं का समाधान किए बिना लगातार नई जिम्मेदारियां दी जा रही हैं।

सेविकाओं का कहना है कि जनगणना प्रक्रिया समय लेने वाली और विस्तृत कार्यप्रणाली वाली होती है, जिससे उनके मूल कार्य प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इसका असर बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं पर पड़ सकता है।

महिला एवं बाल विकास विभाग को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर अतिरिक्त कार्यभार पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनवाड़ी व्यवस्था ग्रामीण और कमजोर आय वर्ग के परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बाल पोषण, प्राथमिक शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम होती है।

भारत में जनगणना जैसे बड़े प्रशासनिक कार्यों में विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की सहायता ली जाती रही है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां दिए जाने से काम का दबाव बढ़ता जा रहा है।

सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ संगठनों ने आंगनवाड़ी सेविकाओं की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ता है तो सेवा की गुणवत्ता और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन को संतुलित व्यवस्था बनाने की जरूरत है।

फिलहाल, सरकार की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों और प्रशासन के बीच बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है।

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