29 अप्रैल 2026 : हरियाणा के पानीपत और सोनीपत की अनाज मंडियों में इन दिनों अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है। खरीदे गए गेहूं के उठान (लिफ्टिंग) में देरी के कारण मंडियों में भारी जाम की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे किसानों और आढ़तियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, सरकारी एजेंसियों द्वारा गेहूं की खरीद तो समय पर कर ली गई, लेकिन उसे मंडियों से उठाने की प्रक्रिया धीमी चल रही है। इसके चलते मंडियों में गेहूं का स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है और नई फसल के लिए जगह की कमी हो रही है।
किसानों का कहना है कि वे अपनी फसल बेचने के बाद भी मंडियों में ही फंसे हुए हैं। कई किसानों को अपनी ट्रॉलियों के साथ कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं। इसके अलावा, खुले में रखे गेहूं के खराब होने का भी खतरा बना हुआ है।
आढ़तियों (कमीशन एजेंट्स) ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि उठान में देरी के कारण मंडियों में कामकाज प्रभावित हो रहा है और व्यापारिक गतिविधियां धीमी पड़ गई हैं। उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।
अधिकारियों का कहना है कि उठान में देरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे परिवहन की कमी, गोदामों में जगह की समस्या और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया है कि स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इस समस्या का असर केवल किसानों और व्यापारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। गेहूं के समय पर उठान न होने से आगे की वितरण प्रक्रिया में भी देरी हो सकती है, जिससे बाजार में कीमतों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल फसल के मौसम में इस तरह की समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन अगर पहले से बेहतर योजना बनाई जाए, तो इनसे बचा जा सकता है। इसके लिए परिवहन और भंडारण की व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति को गंभीरता से लिया है और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे उठान की प्रक्रिया को तेज करें। इसके लिए अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था और गोदामों में जगह उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है।
किसानों ने मांग की है कि सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले, ताकि हर साल उन्हें इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय पर उठान नहीं होता, तो उनकी फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
फिलहाल, मंडियों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा और किसानों को राहत मिलेगी।
